वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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वैराग्यशतक ७७६
हे खी ! अब तू अपनी कामसद पैदा करने वाली दुष्टि को रोक ले, हम पर कटाक्षवाक्ष न जला । तेरा परिश्रम व्यर्थ आयगा । क्योंकि अब हमने विषयों को तुष्टवत् त्याग दिया है ।