वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १ )
पर ध्यान न देकर, भावार्थ पर ध्यान दिया गया है। सरलता के लिये ही पूरी स्वतन्त्रतासे काम लिया गया है।
आरम्भमें मूल श्लोक, उसके नीचे भावार्थ, भावार्थके नीचे व्याख्या, व्याख्याके अन्तमें महाराज श्री प्रताप सिंह जूकी चित्ताकर्षिणी कविताएँ और शेषमें अँगरेज़ी अनुवाद दिया गया है। भावार्थ, कविता और अङ्गरेज़ी अनुवादके साथ मूल श्लोकोंके नम्बर दिये गये हैं। व्याख्याके साथकी कविताओंके साथ नम्बर नहीं दिये गये हैं, क्योंकि वे “वैराग्यशतक” के मूल श्लोकोंके भावकी अक्षर-अक्षर घोतक नहीं। वे तो पाठकोंको दिलचस्पो के लिए व्याख्या के साथ दे दी गई हैं। जहाँ शक हो सका है, व्याख्याओंके साथ उपयुक्त कविता ही दी गई हैं। आशा है, वे अधिकांश पाठकों को रोचक मालूम होंगी।
इस पुस्तकके तैयार करनेमें “तुलसी सतसई” सुन्दर, विलास, “कबीरकी साखी” प्रभृति ग्रन्थोंके सिवा “उस्ताद जूकी” “महाकवि दागू” और “महाकवि ग़ालिब” से भी मौहौमोंके की कविताएँ ली गई हैं; उनके लिए हम पूज्यपाद विद्वद्दर श्रीमान् पण्डित ज्वालादत्त जी शर्मा, सम्पादक “प्रतिभा” के बहुत अमारी हैं।
इस पुस्तककी तैयारीमें, हमारे एक मित्र महाशयने कम-से-कम चौथे हिस्सेका काम किया है। हम उनका नाम देना चाहते थे। इसके लिए हमने उन्हें लिखा भी, पर वे इससे