भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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असन्तुष्ट होते हुए मालूम हुए, इसलिये उनका नाम भूमिकामें नहीं लिखा गया है। उनके सिवा हमारे विद्वान् मित्र बाबू जोगमूल जी चौपड़ा बी० ए०, बी० एल०, वकील, स्नातक काज कोर्ट, कलकत्ताने भी हमें बहुत कुछ सहायता दी है, इसलिये हम वकील साहबके अतीव कृतज्ञ हैं।

इस पुस्तकमें, इस कागज़ के दुर्भिक्षके समय, खासी रक़म लगाकर, प्रायः २० भावपूर्ण हाफटोन चित्र मौके-मौके पर सजा दिये गये हैं। आशा है, हिन्दी-प्रेमी सज्जन हमारी बुटियों की और ध्यान न देकर, हमें उत्साहित करेंगे, जिससे हम भविष्य में और भी अच्छी तरह मातृभाषाकी सेवा कर सकें।

कलकत्ता । १५-४-२० ई०

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विनीत—

हरिदास ।