भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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महाराजा भर्तृहरि भूपालोंमें आदर्श भूपाल हो गये हैं। उन्होंने जो किया है वह शायद ही कोई भूपाल उनके बाद कर सका हो । जब तक सूर्य्य चन्द्रमा रहेगे, जब तक यह दुनिया रहेगी, तब तक महाराजका प्रातःस्मरणीय पुण्यश्लोक नाम लोगोंकी ज़बान पर रहेगा ।

हमने महाराजा भर्तृहरि और महाराजा विक्रमादित्यके सम्बन्धमें जो कुछ लिखा है, वह एक थियेट्रिकल कम्पनीके तमाशे और एक पुरानी पुस्तकके आधार पर लिखा है, जो हमने, कोई २५ साल पहले, एक पलटनकी लाइब्रेरीमें अज़ारेज़ो और हिन्दीमें देखी थी। इमें जो याद था वही लिखा है। इस समय न तो हमारे पास वह पुस्तक ही है और न हमें उसका नाम ही याद है।