वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya
महर्षि कणाद द्वारा
स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयाऽध्याय २ आन्हिक ४५
पूर्व अभ्यास किये वर्णों की स्मृति की अपेक्षा से आत्मा और मन के संयोग से पहले वर्णोच्चारण की इच्छा होती है, फिर प्रयत्न. उस प्रयत्न की अपेक्षा करते हुये मन और वायु के संयोग से उदरस्थ वायु में कर्म होता है, उस से ऊपर को चलता हुवा वायु फिर कण्ठादि में चोट करता है, उस चोट से कण्ठादि आकाश से संयोग करते हैं, तब अक्षर (आकाश कारण से) उत्पन्न होते हैं । यह क्रम है ॥ ध्वन्यात्मक शब्द में प्रथम नङ्गारे और दण्डे का संयोग होता है, वह निमित्त कारण है, नङ्गारे और आकाश का संयोग असमवायी कारण है । इसी प्रकार वंश के टूटने पर जो शब्द होता है, उस का निमित्त कारण विभाग है और वंश और आकाश का विभाग असमवायी कारण है । और जब एक स्थान का शब्द दूसरे दूर स्थान में सुनाई देता है, तब शब्द से शब्द उत्पन्न होता जाता है और परस्पर तार सा पुरता चला जाता है । क्योंकि जब हम दूरस्थ शब्द को सुनते हैं तो हमारे कान तो शब्दोत्पत्ति के स्थान तक जाते नहीं । शब्द स्वयं भी हम तक चलकर नहीं आ सकता, क्योंकि शब्द गुण है और क्रियारहित है और बिना प्राप्त हुवे को ग्रहण करना भी हमारे कानों वा किन्हीं अन्य इन्द्रियों का सामर्थ्य नहीं, तब फिर दूरस्थ शब्द क्यों सुनाई पड़ता है ? उत्तर में कहना पड़ेगा कि जहां शब्द हुवा, उस ने अपने समीप दूसरा शब्द उत्पन्न कर दिया, उस ने फिर और शब्द उत्पन्न कर दिया, बस जैसे पानी की एक लहर अपने से आगे लहर को उत्पन्न करती है और वह फिर उस से आगे एक अन्य लहर को उत्पन्न करती है । इसी प्रकार शब्द से शब्द उत्पन्न होता हुवा, दूरस्थ पुरुष के कानों को सुनाई पड़ता है और जिस प्रकार जलाशय में मृत्पिण्ड फेंकने से जो ऊंची लहरी वा तरङ्ग उत्पन्न होती है, वह फिर आगे अधिक फैली हुई कुछ नीची तरङ्ग को उत्पन्न करती है, उस से और भी नीची, और अन्त में कम होते २ तरङ्ग नहीं दीख पड़ती, इसी प्रकार तोपों तक के घोर भारी शब्द भी ज्यों २ दूर पहुंचते जाते हैं, कम होते जाते हैं । इस प्रकार शब्द से शब्दसन्तान में वायु आदि निमित्त कारण और पूर्व पूर्व शब्द असमवायी कारण है । और जितनी २ दूर में शब्द उत्पन्न होता है, उतना २ वहां २ का आकाश उस शब्द का समवायी कारण वा उपादान कारण होता है ॥ यदि कहो कि शब्द की उत्पत्ति संयोगादि कारणों से हो, इतने से शब्द की नित्यता क्या सिद्ध हुई ? तो उत्तर-