भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 98, कुल 160 में से

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९४ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद क्यों जी ! जब मूसल ओखली में चोट खाकर फिर ऊपर को उछलता है, तब उस के ऊपर उठने में कारण क्या है ? क्या हाथ का संयोग ही उस का कारण है ? उत्तर, नहीं- १८५-अभिघातजे मुशलादौ कर्मणि व्यतिरेका- दऽकारणं हस्तसंयोगः ॥ ३ ॥ (अभिघातजे) चोट देने से उत्पन्न हुए (मुशलादौ) मूसल आदि में (कर्मणि) जो क्रिया उत्पन्न होती है उस में (हस्तसंयोगः) हाथ का संयोग (अकारणम्) कारण नहीं है (व्यतिरेकात्) तद्भिन्न होने से ॥ हाथ से पकड़ कर जब मूसल को ओखली में मारते हैं तब मूसल फिर ऊपर को उठता है उस के उठने में केवल हाथ का संयोग कारण नहीं है क्यों कि चोट खाया हुवा मूसल आदि विना हाथ लगाये अपने आप भी ऊपर को उछलता है इस लिये हाथ का संयोग मूसल के उठने में कारण नहीं है किन्तु वेग कारण है ॥ ३ ॥ और भी- १८६-तथात्मसंयोगो हस्तकर्मणि ॥ ४ ॥ (तथा) इसी प्रकार (आत्मसंयोगः) आत्मा का संयोग (हस्तकर्मणि) हाथ के उठने रूप कर्म में [कारण नहीं है ] ॥ ४ ॥ प्रश्न-तौ फिर हाथ के उठने में कारण क्या है ? उत्तर- १८७-अभिघातान्मुशलसंयोगाद्धस्ते कर्म ॥ ५ ॥ (अभिघातात्) चोट मारने से (मुशलसंयोगात्) मूसल को पकड़े रहने से (हस्ते) हाथ में (कर्म) उठने की क्रिया होती है ॥ मूसल को ओखली में मारने से मूसल में वेग उत्पन्न होता है और वेग- वान् मूसल के संयोग से हाथ में ऊपर को उठना रूप कर्म होता है, उस कर्म में आत्मा का संयोग वा मन का संयोग कारण नहीं, किन्तु मूसल में उत्पन्न हुवा वेग ही हाथ लगने से हाथ के उठने में कारण है ॥ ५ ॥ क्यों जी ! हाथ के उठने में तौ मूसल का वेग कारण है परन्तु हाथ के साथ २ अन्य शरीर के उभार में क्या कारण है ? उत्तर- १८८-आत्मकर्म हस्तसंयोगाच्च ॥ ६ ॥ (हस्तसंयोगात्) हाथ के संयोग से (च) और वेग से (आत्मकर्म) आपे [देह] में कर्म होता है ॥