भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 160 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 99

अर्थात् उछलते हुए मूसल के साथ संयुक्त हुवा हाथ ऊपर को उठता है और उठते हुए हाथ के साथ संयुक्त होने से शरीर भी ऊपर को उठता है, तब शरीर के ऊपर उठने में भी आत्मा का प्रयत्न कारण नहीं, किन्तु हाथ का संयोग और वेग ही कारण है ॥ ६ ॥ प्रश्न-अच्छा, हाथ और मूसल के उठने में तो वेग कारण हुवा परन्तु मूसल के फिर नीचे गिरने में क्या कारण है क्योंकि हाथ अलग करलेने पर भी मूसल नीचे गिरा करता है ? उत्तर- १८६-संयोगाभावे गुरुत्वात् पतनम् ॥ ७ ॥ ( संयोगाभावे ) हाथ का संयोग न रहने पर ( गुरुत्वात् ) भारी होने से ( पतनम् ) गिरना होता है ॥ ७ ॥ क्यों जी ! भारी होने से केवल नीचे ही को गिरना क्यों होता है जब कि उठे हुए मूसल के चारों ओर एकसा आकाश है तब मूसल केवल नीचे ही को क्यों गिरता है ? पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, उत्तर वा ऊपर को क्यों न गिरने लगे ? उत्तर- १९०-नोदनविशेषाभावान्नोर्ध्वं न तिर्यग् गमनम् ॥ ८ ॥ ( नोदनविशेषाभावात् ) प्रेरणा विशेष के न होने से ( ऊर्ध्वम् ) ऊपर को ( न ) नहीं और ( तिर्यग् ) पूर्व पश्चिम दक्षिण उत्तर को तिरछा ( गम- नम् ) गमन भी ( न ) नहीं होता ॥ ऊपर को उठा हुवा मूसल और भी ऊपर को उठता अथवा पूर्व पश्चि- मादि दिशाओं को तिरछा जाता, यदि आत्मा में प्रेरणा विशेष होती, परन्तु प्रेरणा विशेष न होने से मूसल किसी अन्य दिशा को नहीं चलता किन्तु सूत्र ७ में कहे गुरुत्वकारण से जिस में पृथिवी और मूसल का गुरुत्वधर्म आकर्षक है, केवल नीचे को गिरता है ॥ ८ ॥ प्रश्न-प्रेरणा विशेष क्यों नहीं होती और क्यों होती है ? उत्तर- १९१-प्रयत्नविशेषात्नोदनविशेषः ॥ ९ ॥ ( प्रयत्नविशेषात् ) विशेष प्रयत्न से ( नोदनविशेषः ) विशेष प्रेरणा होती है ॥