वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रत्यवसानार्थशब्दकर्माकर्मकाणामणि कर्त्ता स णौ (१।४।५२) and "ह्रीक्र्योरन्यतरस्याम्" (१।४।५३). Look at line 34: "गत्यर्थाकर्मक..." Wait, what are the letters after 'गत्यर्थाकर्मक'? Let's zoom in on line 34: "अन्येषां गत्यर्थाकर्मक..." Then: 'ह्रुकरीणां'? Look at the characters: ह्र (ह with ऋ = हृ) क (क with repha and ई? or क carrying something?) Wait, let's look at the letters: ग, त्य, र्था, क, र्म, क, हृ, क, रो, ती, नां Wait: 'हृ' or 'अकर्मक'? Wait, the text has: ग - त्य - र्था - क - र्म - क - हृ - क्रो - र्ण्ये - न्ता - नां? Wait, look at: ग - त्य - र्था - क - र्म - क - ह्री - क्रो - री - णां? Let's examine: अ - न्ये - षाम् ग - त्य - र्था - क - र्म - क - ... Wait! Look at line 12 of the main text: "प्रयोज्यकर्मण्यन्येषां ण्यन्तानां लादय