वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
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न् आयादेशश्च पृडे उत्तरपदे ।Wait,पृडेorमृडे? Look at line 2: पृडेorमृडे? Line 3: उपचेयमृडमन्यत् । मृड सुखने ।Wait! In line 3:उपचेयमृडमन्यत्orउपचेयपृडमन्यत्? Wait, the Mantra is: उपचेयं पृडम्orउपचेयं मृडम्? उपचेयं मन्दमृडम्? No, उपचेयं मृडम्orउपचेयपृडम्? Look at line 2: पृडेvsमृडे. The letter has a loop on the left like मृorपृ? Look at line 3: उपचेयपृडम्orउपचेयमृडम्? Wait, मृड सुखनेin line 3 definitely starts withमृ! And before that, in line 3: ॥ हिरण्य इति वक्तव्यम् * ॥ उपचेयमृडमन्यत् । मृड सुखने ।Wait, afterमृड सुखने ।it says:मृड चेत्यस्मादिगुपधल-! Wait, look at line 3: Is it मृड चेत्यस्मात्? Letter: म