भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

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पृष्ठ 623

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कृत्यल्युटो बहुलम् ॥ ११३ ॥ नपुंसके भावे क्तः ॥ ११४ ॥ ल्युट् च ॥ ११५ ॥ कर्मणि च येन संस्पर्शात्कर्त्तुः शरीरसुखम् ॥ ११६ ॥ करणाधिकरणयोश्च ॥ ११७ ॥ पुंसि संज्ञायां घः प्रायेण ॥ ११८ ॥ गोचरसंचरवहम्रजव्यजापणनिगमाश्च ॥ ११९ ॥ अवे तृस्त्रोर्घञ् ॥ १२० ॥ ६ ॥ हलश्च ॥ १२१ ॥ अध्यायन्यायोद्यावसंहारौक्ष ॥ १२२ ॥ उदङ्कोऽनुदके ॥ १२३ ॥ जाल- मानायः ॥ १२४ ॥ खनो व च ॥ १२५ ॥ ईषद्दुःसुषु कृच्छ्राकृच्छ्रार्थेषु खल् ॥ १२६ ॥ कर्तृ- कर्मणोश्च भूकृञोः ॥ १२७ ॥ आतो युच् ॥ १२८ ॥ छन्दसि गत्यर्थेभ्यः ॥ १२९ ॥ अन्ये- भ्योऽपि दृश्यते ॥ १३० ॥ वर्तमानसामीप्ये वर्तमानवद्वा ॥ १३१ ॥ आशंकायां भूतवच्च ॥ १३२ ॥ क्षिप्रवचने लृट् ॥ १३३ ॥ आशांसावचने लिङ् ॥