वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूत्रपाठः । (२१) ल्यकार्मार्थाभ्यां च ॥ १५५ ॥ अणो द्व्यचः ॥ १५६ ॥ उदीचां वृद्धाद्गोत्रात् ॥ १५७ ॥ वार्किनादीनां कुक् च ॥ १५८ ॥ पुत्रान्तादन्यतरस्याम् ॥ १५९ ॥ प्राचामवृद्धात् फिन् बहु- लम् ॥ १६० ॥ ८ ॥ मनोजातावञ्यतौ षुक् च ॥ १६१ ॥ अपत्यं पौत्रप्रभृति गोत्रम् ॥ १६२ ॥ जीवति तु वंश्ये युवा ॥ १६३ ॥ भ्रातरि च ज्यायसि ॥ १६४ ॥ वान्यस्मिन् सपिण्डे स्थविरतरे जीवति ॥ १६५ ॥ वृद्धस्य च पूजायाम् ॥ १६६ ॥ यूनश्च कुत्सायाम् ॥ १६७ ॥ जनपदशब्दात् क्षत्रियादञ् ॥ १६८ ॥ साल्वेयगान्धारिभ्यां च ॥ १६९ ॥ द्व्यञ्मगधकलिङ्ग- सूरमसादण् ॥ १७० ॥ वृद्धेत्कोसलाजादाञ्ञ्यङ् ॥ १७१ ॥ कुरुनादिभ्यो ण्यः ॥ १७२ ॥ साल्वावयवप्रत्यग्रथकालकूटाश्मकादिञ् ॥ १७३ ॥ ते तद्रा