भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

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: In line 20: मातृपितृभ्यां - that's तृ. In line 25: व्यग्निभ्यः - त्रि in line 25: अम्बाऽम्बगोभूमिसव्यापद्द्रित्रिकुशे... -> look at द्रित्रिकुशे: the त्रि has a looped left leg! Yes, the font uses the Marathi/old-style त्र which looks a bit like or a loop. Wait, but in line 4, द्वित्रि-: Wait, does it say द्विखि- or द्वित्रि-? Wait, 8.3.43 is: द्वित्रिश्चतुरिति कृत्वोऽर्थे! And in line 5 (L6), it starts: श्चतुरिति कृत्वोऽर्थे! So it is definitely द्वित्रि-!

Let's check L6: श्चतुरिति कृत्वोऽर्थे ॥ ४३ ॥ इसुसोः सामर्थ्ये ॥ ४४ ॥ नित्यं समासेऽनुत्तरपदस्थस्य ॥ Wait, इसुसोः or इण्सुसोः? इसुसोः सामर्थ्ये (8.3.44). Correct.

Let's check L7: ॥ ४५ ॥ अतः कृकमिक