भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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( ५० ) अष्टाध्यायीसूत्रपाठः । रषाभ्यां नो णः समानपदे ॥१॥ अट्कुप्वाङ्नुम्व्यवायेऽपि ॥२॥ पूर्वपदात्संज्ञायामगः ॥३॥ वनं पुरगामिश्रकासिद्धकाशारिकाकोटरग्रेभ्यः ॥ ४ ॥ प्रनिरन्तः शरेक्षुपलक्षाम्रकार्ष्यखदिरपीयू- क्षाभ्योऽसंज्ञायामपि ॥ ५ ॥ विभाषौषधिवनस्पतिभ्यः ॥ ६ ॥ अहोऽदन्तात् ॥ ७ ॥ वाहन- माहितौ ॥ ८ ॥ पानं देशे ॥ ९ ॥ वा भावकरणयोः ॥ १० ॥ प्रातिपदिकान्तनुम्विभक्तिषु च ॥ ११ ॥ एकाजुत्तरपदे णः ॥ १२ ॥ कुमति च ॥ १३ ॥ उपसर्गादसमासेऽपि णोप- देशस्य ॥ १४ ॥ हिनु मीना ॥ १५ ॥ अनि लोट् ॥ १६ ॥ नेर्गदनदपतपदघुमास्यति- हन्तियातिवातिद्रातिप्सातिवपतिवहतिशाम्यतिचिनोतिदेग्धिषु च ॥ १७ ॥ शेषे विभाषाकखादा- चषान्त उपदेशे ॥ १८ ॥ अनितेः