वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें..." Wait! Let's re-examine that word: "वर्णावयवावयवेनाभिमत जो यावद् वर्ण" Is it "वर्णावयवावयवेनाभिमत" or "वर्णावयवेनावयवेनाभिमत"? Let's read the characters: व (va) र्णा (rṇā) व (va) य (ya) वा (vā) व (va) य (ya) वे (ve) ना (nā) भि (bhi) म (ma) त (ta) Wait, "वर्णावयवावयवेनाभिमत": Let's check: वर्णा - व - य - वा - व - य - वे - ना - भि - म - त Yes, exactly! "वर्णावयवावयवेनाभिमत" - wait, look at 'त': The bottom of 'त' is clear, it's 'त'! Then "जो यावद् वर्ण तन्निष्ठा-"
Look at : "त्यन्ताभाव प्रतियोगीत्व वर्णावयव में है और दूसरा 'अधिष्ठानसत्तातिरिक्तसत्ताशून्यत्व'रूप है।" Wait, "प्रतियोगीत्व" has a space before it? "त्यन्ताभाव प्रतियोगीत्व" - yes, there is a space.
Look at : "'ग्रामशब्दोऽयं बह्वर्थः' इति, सर