वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ४ ] इनके अतिरिक्त तीन ग्रन्थों के नाम और उपलब्ध हैं जो भर्तृहरि रचित कहे जाते हैं— ( १ ) मीमांसाभाष्य । ( २ ) वेदान्तसूत्रवृत्ति । ( ३ ) शब्दधातुसमीक्षा । इन ग्रन्थों के भर्तृहरि रचित होने के लिए कुछ कहना आवश्यक है जो हम आगे कह रहे हैं। युधिष्ठिर मीमांसक ने अपने 'संस्कृत व्याकरणशास्त्र का इतिहास' ग्रन्थ में प्रथम तीन तथा चार और द्वितीय तीन ग्रन्थों को भर्तृहरि रचित सिद्ध किया है। भट्टिकाव्य और भागवृत्ति किसी अन्य भर्तृहरि की रचित हैं कहा जा सकता है। मीमांसक जी ने अनेक उदाहरणों के द्वारा यह भी सिद्ध किया है कि भर्तृहरि और भागवृत्तिकार एक नहीं हो सकते। एक तो भाषा भिन्न है दूसरे सिद्धान्त भी भिन्न हैं। कहीं-कहीं भर्तृहरि का खण्डन भी है अतः दोनों का एक मानना अयुक्त है। यह भी सम्भावना हो सकती है कि आचार्य भर्तृहरि के नाम से कई विद्वान् प्रसिद्ध हुए हों। क्या भर्तृहरि बौद्ध थे ? चीनी यात्री इ