वामन पुराण
Vamana Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय ५ ] दक्ष-यज्ञका विध्वंस एवं देवताओंका प्रताड़न २९ कर्कः कुलीरेण समः सलिलस्थः प्रकीर्तितः । केदारवापीपुलिने विविक्तावनिरेव च ॥ ५१ सिंहस्तु पर्वतारण्यदुर्गकन्दरभूमिषु । वसते व्याधपल्लीषु गह्वरेषु गुहासु च ॥ ५२ ब्रीहिप्रदीपिककरा नावारूढा च कन्यका। चरते स्त्रीरतिस्थाने वसते नड्वलेषु च ॥ ५३ तुलापाणिश्च पुरुषो वीथ्यापणविचारकः । नगराध्वानशालासु वसते तत्र नारद ॥ ५४ श्वभ्रवल्मीकसंचारी वृश्चिको वृश्चिकाकृतिः । विषगोमयकीटादिपाषाणादिषु संस्थितः ॥ ५५ धनुस्तुरङ्गजघनो दीप्यमानो धनुर्धरः। वाजिशूरास्त्रविद्वीरः स्थायी गजरथादिषु ॥ ५६ मृगास्यो मकरो ब्रह्मन् वृषस्कन्धेक्षणाङ्गजः । मकरोऽसौ नदीचारी वसते च महोदधौ ॥ ५७ रिक्तकुम्भश्च पुरुषः स्कन्धधारी जलाप्लुतः । द्यूतशालाचरः कुम्भः स्थायी शौण्डिकसद्मसु ॥ ५८ मीनद्वयमथासक्तं मीनस्तीर्थाब्धिसंचरः । वसते पुण्यदेशेषु देवब्राह्मणसद्मसु ॥ ५९ लक्षणा गदितास्तुभ्यं मेषादीनां महामुने । न कस्यचित् त्वयाख्येयं गुह्यमेतत्पुरातनम् ॥ ६० एतन् मया ते कथितं सुरर्षे यथा त्रिनेत्रः प्रममाथ यज्ञम्। पुण्यं पुराणं परमं पवित्र- माख्यातवान्यापहरं शिवं च ॥ ६१ विहार-भूमियोंमें होता है। कर्क राशि केकड़ेके रूपके समान रूपवाली है एवं जलमें रहनेवाली है। जलसे पूर्ण क्यारी एवं नदी-तीर अथवा बालुका एवं एकान्त भूमि इसके रहनेके स्थान हैं। सिंह राशिका निवास वन, पर्वत, दुर्गमस्थान, कन्दरा, व्याधोंके स्थान, गुफा आदि होता है ॥ ४९-५२॥ कन्या राशि अन्न एवं दीपक हाथमें लिये हुए है तथा नौकापर आरूढ़ है। यह स्त्रियोंके रतिस्थान और सरपत, कण्डा आदिमें विचरण करती है। नारद ! तुला राशि हाथमें तुला लिये हुए पुरुषके रूपमें गलियों और बाजारोंमें विचरण करती है तथा नगरों, मार्गों एवं भवनोंमें निवास करती है। वृश्चिक राशिका आकार बिच्छू-जैसा है। यह गड्ढे एवं वल्मीक आदिमें विचरण करती है। यह विष, गोबर, कीट एवं पत्थर आदिमें भी निवास करती है। धनु राशिकी जंघा घोड़ेके समान है। यह ज्योतिःस्वरूप एवं धनुष लिये है। यह घुड़सवारी, वीरताके कार्य एवं अस्त्र-शस्त्रोंका ज्ञाता तथा शूर है। गज एवं रथ आदिमें इसका निवास होता है ॥ ५३-५६॥ ब्रह्मन् ! मकर राशिका मुख मृगके मुख-सदृश एवं कंधे वृषके कंधोंके तुल्य तथा नेत्र हाथीके नेत्रके समान हैं। यह राशि नदीमें विचरण करती तथा समुद्रमें विश्राम करती है। कुम्भ राशि रिक्त घड़ेको कंधेपर लिये जलसे भीगे पुरुषके समान है। इसका संचार-स्थान द्यूतगृह एवं सुरालय (मद्यशाला) है। मीन राशि दो संयुक्त मछलियोंके आकारवाली है। यह तीर्थस्थान एवं समुद्र-देशमें संचरण करती है। इसका निवास पवित्र देशों, देवमन्दिरों एवं ब्राह्मणोंके घरोंमें होता है। महामुने ! मैंने आपको मेषादि राशियोंका लक्षण बतलाया। आप इस प्राचीन रहस्यको किसी अपात्रसे न बतलाइयेगा। देवर्षे ! भगवान् शिवने जिस प्रकार यज्ञको प्रमथित किया, उसका मैंने आपसे वर्णन कर दिया। इस प्रकार मैंने आपको श्रेयस्कर, परम पवित्र, पापहारी एवं कल्याणकारी अत्यन्त पुराना पुराण-आख्यान सुनाया ॥ ५७-६१ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीवामनपुराणमें पाँचवाँ अध्याय समाप्त हुआ ॥ ५ ॥