भारतकोश
वामन पुराण

वामन पुराण

Vamana Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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३६२श्रीवामनपुराण[ अध्याय ७३

तिहत्तरवाँ अध्याय

बलि, मय-प्रभृति दैत्योंका देवताओंके साथ युद्ध, कालनेमिके साथ विष्णुभगवान्का युद्ध और कालनेमिका वध

पुलस्त्य उवाच
पुलस्त्य उवाच<br>एतदर्थं बलिर्दैत्यः कृतो राजा कलिप्रिय।<br>मन्त्रप्रदाता प्रह्लादः शुक्रश्चासीत् पुरोहितः ॥ १<br><br>ज्ञात्वाऽभिषिक्तं दैतेयं विरोचनसुतं बलिम्।<br>दिदृक्षवः समायाताः समयाः सर्व एव हि ॥ २<br><br>तानागतानिरीक्ष्यैव पूजयित्वा यथाक्रमम्।<br>पप्रच्छ कुलजान् सर्वान् किंनु श्रेयस्करं मम ॥ ३<br><br>तमूचुः सर्व एवैनं शृणुष्व सुरमर्दन।<br>यत् ते श्रेयस्करं कर्म यदस्माकं हितं तथा॥ ४पुलस्त्यजी बोले—कलिप्रिय (नारदजी)! बलि दैत्यको इसीलिये राजा बनाया गया था। प्रह्लाद उसके परामर्श देनेवाले मन्त्री तथा शुक्राचार्य पुरोहित थे। विरोचनके पुत्र बलि दैत्यको राज्यपर अभिषिक्त हुआ जानकर मयके साथ सभी दैत्य उसे देखनेकी इच्छासे आये। उन (वहाँ) आये हुए अपने कुलपुरुषोंको देखकर (बलिने) यथाक्रम उनकी पूजा की एवं उनसे पूछा कि मेरे लिये क्या कल्याणकारी है? उन सभीने उससे कहा—देवमर्दन! तुम्हारे लिये जो कल्याणकारी और हमारे लिये हितकर कर्म है, उसे सुनो—॥ १-४॥
पितामहस्तव बली आसीद् दानवपालकः।<br>हिरण्यकशिपुर्वीरः स शक्रोऽभूज्जगत्रये ॥ ५<br><br>तमागम्य सुरश्रेष्ठो विष्णुः सिंहवपुर्धरः।<br>प्रत्यक्षं दानवेन्द्राणां नखैस्तं हि व्यदारयत् ॥ ६<br><br>अपकृष्टं तथा राज्यमन्धकस्य महात्मनः।<br>तेषामर्थे महाबाहो शङ्करेण त्रिशूलिना ॥ ७<br><br>तथा तव पितृव्योऽपि जम्भः शक्रेण घातितः।<br>कुजम्भो विष्णुना चापि प्रत्यक्षं पशुवत् तव ॥ ८तुम्हारे पितामह, हिरण्यकशिपु बलवान्, वीर और दानवकुलके पालन करनेवाले थे। तीनों लोकोंके वे इन्द्र हो गये थे। किंतु सिंहशरीर धारणकर देवोंमें श्रेष्ठ श्रीविष्णुने उनके पास आकर श्रेष्ठ दानवोंके सामने ही उन्हें अपने नखोंसे विदीर्ण कर डाला। महाबाहो! त्रिशूल धारण करनेवाले शंकरने भी उन (देवों)-के लिये महान् बलशाली अन्धकका राज्य छीन लिया था। और इन्द्रने तुम्हारे चाचा (पिताके भाई) जम्भको मार दिया एवं विष्णुने तुम्हारे सामने कुजम्भको पशुकी तरह मार डाला॥ ५-८॥
शम्भुः पाको महेन्द्रेण भ्राता तव सुदर्शनः।<br>विरोचनस्तव पिता निहतः कथयामि ते ॥ ९मैं तुमसे बतला दे रहा हूँ कि महेन्द्रेने शम्भु, पाक और तुम्हारे भाई सुदर्शन एवं तुम्हारे पिता विरोचनको मार डाला है।
श्रुत्वा गोत्रक्षयं ब्रह्मन् कृतं शक्रेण दानवः।<br>उद्योगं कारयामास सह सर्वैर्महासुरैः ॥ १०<br><br>रथैरन्ये गजैरन्ये वाजिभिश्चापरेऽसुराः।<br>पदातयस्तथैवान्ये जग्मुर्युद्धाय दैवतैः ॥ ११<br><br>मयोऽग्रे याति बलवान् सेनानाथो भयङ्करः।<br>सैन्यस्य मध्ये च बलिः कालनेमिश्च पृष्ठतः ॥ १२[पुलस्त्यजी कहते हैं कि] ब्रह्मन्! इन्द्रद्वारा किये गये अपने कुलका विनाश सुनकर दानव बलिने समस्त महान् असुरोंको युद्ध करनेके लिये तैयारी करनेकी प्रेरणा दी। फिर तो कुछ असुर रथोंपर, कुछ हाथियोंपर, कुछ घोड़ोंपर और कुछ पैदल ही देवताओंसे युद्ध करनेके लिये चल पड़े। सेनाके आगे-आगे भयङ्कर महाबलशाली सेनापति मय चल रहा था। सेनाके बीचमें
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