वराह पुराण
Varaha Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ३४८ | संक्षिप्तश्रीवराहपुराण | [ अध्याय १९० |
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वसुंधरे! पितरोंकी बात सुनकर राजा मेधातिथि घर वापस गये और उन्होंने अपने पुरोहित चन्द्रशर्माको बुलाया और उनसे उपर्युक्त वृत्तान्त कहा तथा पुनः श्राद्ध करनेकी इच्छा व्यक्त की और निवेदन किया कि इस श्राद्धमें 'कुण्ड-गोलक' ब्राह्मण सर्वथा न बुलाये जायें।
देवि! राजा मेधातिथिके आदेशसे पुरोहित चन्द्रशर्माने ब्राह्मणोंको पुनः बुलाकर पिण्डदान एवं श्राद्ध सम्पन्न कराया और ब्राह्मणोंको भोजन कराया फिर दक्षिणाएँ देकर उनकी पूजा की। इसके बाद सबको विदा करके उन्होंने स्वयं प्रसाद ग्रहण किया। तत्पश्चात् राजा पुनः वनमें गये और वहाँ उन्होंने अपने उन पितरोंको हृष्ट-पुष्ट तथा परम पराक्रमीरूपमें देखा। अब उन नरेशके हर्षकी सीमा न रही। उस अवसरपर पितरोंमें श्रद्धा रखनेवाले राजा मेधातिथिको देखकर पितरोंके मुखमण्डलपर भी प्रसन्नता छा गयी और उन्होंने कहा—'तुम्हारा कल्याण हो। तुमने हमारा हित कर महान् कार्य सम्पन्न किया है। अब हम स्वर्गको जाते हैं।'
देवि! श्राद्धमें संकल्पित अन्नपात्र ब्राह्मणके अभावमें गौको दे अथवा गौके अभावमें भी यत्नपूर्वक उसे नदीमें छोड़ दे, पर किसी प्रकार भी अपात्र, नास्तिक, गुरुद्रोही, गोलक अथवा कुण्डको वह अन्न न दे।
भामिनि! इस प्रकार अपना उद्गार प्रकट करके सभी पितर स्वर्ग चले गये और राजा मेधातिथि ब्राह्मणोंके साथ अपनी पुरीको लौटे। उन्होंने पितरोंकी आज्ञाका यथाविधि पालन किया। देवि! यह इसीलिये मैंने तुम्हें बताया है कि एक भी उत्तम ब्राह्मण मिल जाय तो वही पर्याप्त है। उसीकी कृपासे यज्ञकर्ता कठिनाइयोंसे तर सकता है—इसमें कोई संशय नहीं। वह एक ही विप्र दाताको इस प्रकार पार करनेमें समर्थ है, जैसे अगाध जलको पार करनेके लिये एक नाव। वसुंधरे! अतएव सुपात्र ब्राह्मणको ही दान देना चाहिये। देवता, दानव, मानव, राक्षस, गन्धर्व और उरग—इन सभीके लिये यह विधान है।
[ अध्याय १८९]
श्राद्ध और पितृयज्ञकी विधि तथा दानका प्रकरण
पृथ्वी बोली— भगवन्! देवता, मनुष्य, पशु, एवं पक्षी-प्रभृति सभी प्राणी कालवश प्रेत होते हैं, वे कभी नरकोंमें जाते हैं और पुनः संसारमें भी आते हैं। अब मैं यह जानना चाहती हूँ कि पितर कौन-से हैं, जिन्हें विधिपूर्वक अर्पण करनेसे श्राद्ध-सम्बन्धी पदार्थ भोजनके लिये उपलब्ध होता है? प्रत्येक मासमें संकल्पपूर्वक दिया गया पिण्ड किस प्रकार पितरोंके पास पहुँचता है? पितृक्रियासे सम्बन्ध रखनेवाले श्राद्धमें कौन पितर भोजन पानेके अधिकारी हैं? इस विषयमें मुझे महान् कौतूहल हो रहा है, कृपया निर्णयपूर्वक बतलायें।
भगवान् वराह बोले— देवि! तुम मुझसे जो पूछती हो, उसे मैं बताता हूँ। माधवि! पितृसम्बन्धी यज्ञोंमें भाग पानेके जो अधिकारी हैं, उन्हें सुनो—पिता, पितामह तथा प्रपितामह—इन पितरोंके लिये पिण्डका संकल्प करना चाहिये। पितृपक्ष आनेपर नक्षत्र और तिथिकी जानकारी प्राप्त