वराह पुराण

वराह पुराण
Varaha Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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विषय-सूची
| क्रम | पृष्ठ-संख्या | क्रम | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १-भगवान् वराहके प्रति पृथ्वीका प्रश्न और भगवान्के उदरमें विश्वब्रह्माण्डका दर्शनकर भयभीत हुई पृथ्वीद्वारा उनकी स्तुति................ | ९ | उनका ब्रह्ममें लीन होना .............................. | ४८ |
| २-विभिन्न सर्गोंका वर्णन तथा देवर्षि नारदको वेदमाता सावित्रीका अद्भुत कन्याके रूपमें दर्शन होनेसे आश्चर्यकी प्राप्ति ........................ | ११ | १५-महातपाका उपाख्यान ................................ | ५० |
| ३-देवर्षि नारदद्वारा अपने पूर्वजन्मवर्णनके प्रसङ्गमें 'ब्रह्मपारस्तोत्र' का कथन............................ | १५ | १६-प्रतिपदा तिथि एवं अग्निकी महिमाका वर्णन ....... | ५१ |
| ४-महामुनि कपिल और जैगीषव्यद्वारा राजा अश्वशिराको भगवान् नारायणकी सर्वव्यापकताका प्रत्यक्ष दर्शन कराना ................................. | १७ | १७-अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और उनके द्वारा भगवत्स्तुति ...................................... | ५२ |
| ५-रैभ्य मुनि और राजा वसुका देवगुरु बृहस्पतिसे संवाद तथा राजा अश्वशिराद्वारा यज्ञमूर्ति भगवान् नारायणका स्तवन एवं उनके श्रीविग्रहमें लीन होना...................................................... | २० | १८-गौरीकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग, द्वितीया तिथि एवं रुद्रद्वारा जलमें तपस्या, दक्षके यज्ञमें रुद्र और विष्णुका संघर्ष ........................................... | ५४ |
| ६-पुण्डरीकाक्षपार-स्तोत्र, राजा वसुके जन्मान्तरका प्रसङ्ग तथा उनका भगवान् श्रीहरिमें लय होना ... | २३ | १९-तृतीया तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें हिमालयकी पुत्रीरूपमें गौरीकी उत्पत्तिका वर्णन और भगवान् शंकरके साथ उनके विवाहकी कथा ..... | ५८ |
| ७-रैभ्य-सनत्कुमार-संवाद, गयामें पिण्डदानकी महिमा एवं रैभ्य मुनिका ऊर्ध्वलोकमें गमन ....... | २६ | २०-गणेशजीकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और चतुर्थी तिथिका माहात्म्य ...................................... | ६१ |
| ८-भगवान्का मत्स्यावतार तथा उनकी देवताओंद्वारा स्तुति .................................... | ३० | २१-सर्पोंकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और पञ्चमी तिथिकी महिमा .......................................... | ६३ |
| ९-राजा दुर्जयके चरित्र-वर्णनके प्रसङ्गमें मुनिवर गौरमुखके आश्रमकी शोभाका वर्णन ................ | ३२ | २२-षष्ठी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें स्वामी कार्तिकेयके जन्मकी कथा ............................ | ६५ |
| १०-राजा दुर्जयका चरित्र तथा नैमिषारण्यकी प्रसिद्धिका प्रसङ्ग .................................... | ३५ | २३-सप्तमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें आदित्योंकी उत्पत्तिकी कथा .......................................... | ६८ |
| ११-राजा सुप्रतीककृत भगवान्की स्तुति तथा श्रीविग्रहमें लीन होना .............................. | ४० | २४-अष्टमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें मातृकाओंकी उत्पत्तिकी कथा .......................................... | ६९ |
| १२-पितरोंका परिचय, श्राद्धके समयका निरूपण तथा पितृगीत.......................................... | ४२ | २५-नवमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें दुर्गादेवीकी उत्पत्ति-कथा ........................................... | ७१ |
| १३-श्राद्ध-कल्प.......................................... | ४५ | २६-दशमी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें दिशाओंकी उत्पत्तिकी कथा .......................................... | ७४ |
| १४-गौरमुखके द्वारा दस अवतारोंका स्तवन तथा | २७-एकादशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें कुबेरकी उत्पत्ति-कथा ........................................... | ७४ | |
| २८-द्वादशी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें उसके अधिष्ठाता श्रीभगवान् विष्णुकी उत्पत्ति-कथा ..... | ७५ | ||
| २९-त्रयोदशी तिथि एवं धर्मकी उत्पत्तिका वर्णन ........ | ७६ | ||
| ३०-चतुर्दशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें रुद्रकी |