भारतकोश
वराह पुराण

वराह पुराण

Varaha Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished414 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 414 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 7

विषय-सूची

क्रमपृष्ठ-संख्याक्रमपृष्ठ-संख्या
१-भगवान् वराहके प्रति पृथ्वीका प्रश्न और भगवान्‌के उदरमें विश्वब्रह्माण्डका दर्शनकर भयभीत हुई पृथ्वीद्वारा उनकी स्तुति................उनका ब्रह्ममें लीन होना ..............................४८
२-विभिन्न सर्गोंका वर्णन तथा देवर्षि नारदको वेदमाता सावित्रीका अद्भुत कन्याके रूपमें दर्शन होनेसे आश्चर्यकी प्राप्ति ........................१११५-महातपाका उपाख्यान ................................५०
३-देवर्षि नारदद्वारा अपने पूर्वजन्मवर्णनके प्रसङ्गमें 'ब्रह्मपारस्तोत्र' का कथन............................१५१६-प्रतिपदा तिथि एवं अग्निकी महिमाका वर्णन .......५१
४-महामुनि कपिल और जैगीषव्यद्वारा राजा अश्वशिराको भगवान् नारायणकी सर्वव्यापकताका प्रत्यक्ष दर्शन कराना .................................१७१७-अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और उनके द्वारा भगवत्स्तुति ......................................५२
५-रैभ्य मुनि और राजा वसुका देवगुरु बृहस्पतिसे संवाद तथा राजा अश्वशिराद्वारा यज्ञमूर्ति भगवान् नारायणका स्तवन एवं उनके श्रीविग्रहमें लीन होना......................................................२०१८-गौरीकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग, द्वितीया तिथि एवं रुद्रद्वारा जलमें तपस्या, दक्षके यज्ञमें रुद्र और विष्णुका संघर्ष ...........................................५४
६-पुण्डरीकाक्षपार-स्तोत्र, राजा वसुके जन्मान्तरका प्रसङ्ग तथा उनका भगवान् श्रीहरिमें लय होना ...२३१९-तृतीया तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें हिमालयकी पुत्रीरूपमें गौरीकी उत्पत्तिका वर्णन और भगवान् शंकरके साथ उनके विवाहकी कथा .....५८
७-रैभ्य-सनत्कुमार-संवाद, गयामें पिण्डदानकी महिमा एवं रैभ्य मुनिका ऊर्ध्वलोकमें गमन .......२६२०-गणेशजीकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और चतुर्थी तिथिका माहात्म्य ......................................६१
८-भगवान्‌का मत्स्यावतार तथा उनकी देवताओंद्वारा स्तुति ....................................३०२१-सर्पोंकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और पञ्चमी तिथिकी महिमा ..........................................६३
९-राजा दुर्जयके चरित्र-वर्णनके प्रसङ्गमें मुनिवर गौरमुखके आश्रमकी शोभाका वर्णन ................३२२२-षष्ठी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें स्वामी कार्तिकेयके जन्मकी कथा ............................६५
१०-राजा दुर्जयका चरित्र तथा नैमिषारण्यकी प्रसिद्धिका प्रसङ्ग ....................................३५२३-सप्तमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें आदित्योंकी उत्पत्तिकी कथा ..........................................६८
११-राजा सुप्रतीककृत भगवान्‌की स्तुति तथा श्रीविग्रहमें लीन होना ..............................४०२४-अष्टमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें मातृकाओंकी उत्पत्तिकी कथा ..........................................६९
१२-पितरोंका परिचय, श्राद्धके समयका निरूपण तथा पितृगीत..........................................४२२५-नवमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें दुर्गादेवीकी उत्पत्ति-कथा ...........................................७१
१३-श्राद्ध-कल्प..........................................४५२६-दशमी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें दिशाओंकी उत्पत्तिकी कथा ..........................................७४
१४-गौरमुखके द्वारा दस अवतारोंका स्तवन तथा२७-एकादशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें कुबेरकी उत्पत्ति-कथा ...........................................७४
२८-द्वादशी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें उसके अधिष्ठाता श्रीभगवान् विष्णुकी उत्पत्ति-कथा .....७५
२९-त्रयोदशी तिथि एवं धर्मकी उत्पत्तिका वर्णन ........७६
३०-चतुर्दशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें रुद्रकी