भारतकोश
वराह पुराण

वराह पुराण

Varaha Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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क्रमपृष्ठ-संख्याक्रमपृष्ठ-संख्या
उत्पत्तिका वर्णन .................७८६३-कलियुगका वर्णन .................१२५
३१-अमावास्या तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें पितरोंकी<br>उत्पत्तिका कथन .................८१६४-प्रकृति और पुरुषका निर्णय .................१२८
३२-पूर्णिमा तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें उसके स्वामी<br>चन्द्रमाकी उत्पत्तिका वर्णन .................८१६५-वैराज-वृत्तान्त .................१२९
३३-प्राचीन इतिहासका वर्णन .................८३६६-भुवन-कोशका वर्णन .................१३२
३४-आरुणि और व्याधका प्रसङ्ग, नारायण-मन्त्रश्रवणसे<br>बाघका शापसे उद्धार .................८४६७-जम्बूद्वीपसे सम्बन्धित सुमेरुपर्वतका वर्णन ...........१३४
३५-सत्यतपाका प्राचीन प्रसङ्ग .................८७६८-आठ दिक्पालोंकी पुरियोंका वर्णन .................१३७
३६-मत्स्य-द्वादशीव्रतका विधान तथा फल-कथन ......८८६९-मेरुपर्वतका वर्णन .................१३७
३७-कूर्म-द्वादशीव्रत .................९३७०-मन्दर आदि पर्वतोंका वर्णन .................१३९
३८-वराह-द्वादशीव्रत .................९४७१-मेरुपर्वतके जलाशय .................१३९
३९-नृसिंह-द्वादशीव्रत .................९६७२-मेरुपर्वतकी नदियाँ .................१४१
४०-वामन-द्वादशीव्रत .................९७७३-देवपर्वतोंपरके देव-स्थानोंका परिचय..................१४२
४१-जामदग्न्य-द्वादशीव्रत .................९८७४-नदियोंका अवतरण .................१४३
४२-श्रीराम एवं श्रीकृष्ण-द्वादशीव्रत .................९९७५-नैषध एवं रम्यकवर्षोंके कुलपर्वत, जनपद<br>और नदियाँ .................१४४
४३-बुद्ध-द्वादशीव्रत .................१००७६-भारतवर्षके नौ खण्डोंका वर्णन .................१४६
४४-कल्कि-द्वादशीव्रत .................१०२७७-शाक एवं कुशद्वीपोंका वर्णन .................१४७
४५-पद्मनाभ-द्वादशीव्रत .................१०३७८-क्रौञ्च और शाल्मलिद्वीपका वर्णन .................१४८
४६-धरणीव्रत .................१०५७९-त्रिशक्ति-माहात्म्य और सृष्टिदेवीका आख्यान .......१४९
४७-अगस्त्य-गीता .................१०७८०-त्रिशक्ति-माहात्म्यमें 'सृष्टि', 'सरस्वती' तथा 'वैष्णवी'<br>देवियोंका वर्णन .................१५१
४८-अगस्त्य-गीतामें पशुपालकका चरित्र .................१०८८१-महिषासुरकी मन्त्रणा और देवासुर-संग्राम ...........१५३
४९-उत्तम पति प्राप्त करनेका साधनस्वरूप व्रत ..........१०९८२-महिषासुरका वध .................१५५
५०-शुभ-व्रत .................११०८३-'त्रिशक्तिमाहात्म्य'में रौद्रीव्रत .................१५८
५१-धन्य-व्रत .................११२८४-रुद्रके माहात्म्यका वर्णन .................१६१
५२-कान्ति-व्रत .................११३८५-सत्यतपाका शेष वृत्तान्त .................१६२
५३-सौभाग्य-व्रत .................११४८६-तिलधेनुका माहात्म्य .................१६४
५४-अविघ्नव्रत .................११५८७-जलधेनु एवं रसधेनु-दानकी विधि .................१६८
५५-शान्ति-व्रत .................११६८८-गुड़धेनु-दानकी विधि .................१६९
५६-काम-व्रत .................११६८९-शर्करा तथा मधुधेनुके दानकी विधि .................१७०
५७-आरोग्य-व्रत .................११७९०-'क्षीरधेनु' तथा 'दधिधेनु'-दानकी विधि ...........१७२
५८-पुत्रप्राप्ति-व्रत .................११९९१-'नवनीतधेनु' तथा 'लवणधेनु' की दानविधि .......१७३
५९-शौर्य एवं सार्वभौम-व्रत .................११९९२-'कार्पास' एवं 'धान्य-धेनु' की दानविधि ..........१७५
६०-राजा भद्राश्वका प्रश्न और नारदजीके द्वारा<br>विष्णुके आश्चर्यमय स्वरूपका वर्णन...............१२०९३-कपिलादानकी विधि एवं माहात्म्य .................१७६
६१-भगवान् नारायण-सम्बन्धी आश्चर्यका वर्णन ........१२२९४-कपिला-माहात्म्य, 'उभयतोमुखी' गोदान,<br>हेम-कुम्भदान और पुराणकी प्रशंसा............१७७
६२-सत्ययुग, त्रेता और द्वापर आदिके गुणधर्म..........१२३९५-पृथ्वीद्वारा भगवान्‌की विभूतियोंका वर्णन ...........१८१
९६-श्रीवराहावतारका वर्णन .................१८२
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