वासवदत्ता (महाकवि सुबन्धु - श्लेष-प्रधान शास्त्रीय गद्यकाव्य सान्वय सटीक)
Vasavadatta of Mahakavi Subandhu with Commentary
महाकवि सुबन्धु द्वारा
पृष्ठ 209, कुल 244 में से
संदर्भ में पढ़ेंणं¹) द्विजराजो ऽकरोत्। पुरूरवा ब्राह्मणधनतृष्णया विन- नाश। नहुषश् (शक्र)कलत्र(दोहळी भुजंगताम् अयासीत्)। य- यातिः (कृतपुरोहितसुता)पाणिग्रहणः [२७४] पपात। सुद्युम्नः स्त्रीमय (एवा) ऽभवत्। सोमकस्य प्रख्याता (जगती²) जंतुव- धनिर्घृणता। पुरुकुत्सः कुत्सित (एवा ऽभवत्)। कुवलयाश्वो ऽश्व[२७५]तारकन्न्यामपि (जगाम)। नृगः कृकलासताम् अगमत्। (नलः कलिना ऽभिभूतः।) संवरणो मित्रदुहितरि विक्लबताम् (अगमत्)। [२७६] दशरथः (अभी)ष्टरामोन्मादेन मृत्युम् अवा- प। कार्तवीर्यो [गो]ब्राह्मणपीडया पंचत्वम् अयासीत्। [युधि- ष्ठिरः समरशिरसि सत्यम् उत्ससर्ज।] (शंतनुर्³) अतिव्यसनात् (वने⁴) विललाप। (तद्) इत्थं ना ऽस्त्य् (एव जगत्य्) अकळंकः को ऽपि। तद् अहम् अपि देहम् (उत्सृ(१०८)जामी) ऽत्य् (एवं) वि[२७७]चिं- त्य कुरर[खर]नखरशिखरखंडित(पृथुळ⁵)पृथुरोम- [बिलमविरलशकुलकुल]शल्क(संकुलं⁶ संकलित)जलनकुल(कु- लो⁷)च्चार(शारं) क्रोष्टुकुलोत्सृष्टविकटकर्कटकर्परपरंपरा- परिगत(प्रांतं⁸ अतितरळ)जलरयलुळितचतुळशफरकुलकब- लनकृतमतिनिभृतबकशकुनिनिवह(बहु)धवळितपरिसरम् अतिचपलजलकपिकुलविहरण(तुलिर⁹)सलिलकण[२७८]निकर(परिमि- ळनशिशिरिततामालतलं अनुदिन)निपतदतितरुण[वन]महिषग- वलशिखर(वि)लिखितविषमतटम् अनवरतचरदसितमुखचर- णविहग(वर)निवह(मधुकर)निनद(मुखरित)हिमकर(कि- रणनिकर)[२७९]रुचिरजलमनुज(गण)शयनमृदित(तटधरणी)- तलम् अति(बहुळ)मद[जल]शबळ(कट¹⁰)तटकरि[वर]शतनिपतित- मधुकर(निकरम्¹¹) अतिजवनपवनविधुतजल(विघटन)निप- तित(फणि)गणपरिगतपरिसरं जलनिधि(जलगता)भुजगनिर्मु- क्तनिर्मोकपट्टम् [इव] दर्पणम् इव वसुंधरायाः स्फटिककु- ट्टिमम् इव वरुणस्य (कमलवनम् इव सपद्मरागं वनप्र- ¹ So also Hall's manuscripts, A, B, C, D, F, G, H. ² So also Hall's manuscript D. ³ So also Hall's manuscripts A, C, F, H. ⁴ So also Hall's manuscripts A, F, H. ⁵ So also Hall's manuscripts B, D. ⁶ So also Hall's manuscripts A, B, C, D, E, F, H, and the commentators Jagaddhara and Narasiṁha. ⁷ So also Hall's manuscripts A, B, C, D, E, F, G, H, and the commentator Narasiṁha. ⁸ So also Hall's manuscripts B, C, D, F, G, H. ⁹ Tel. ed. 61, Grantha ed., Trichinopoly ed., and Srirangam text, tulita. ¹⁰ This reading is also recorded by Śivarāma, ad loc. ¹¹ So also Hall's manuscripts A, B, F.