भारतकोश
वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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? No, look at the cluster: It has द् + ध with य: "बुद्ध्यति" or "बुद्ध्व्यति"? Wait, in line 28: ब, then द्ध with य = बुद्ध्यति. Wait, is there a व? No, it's just a ligature for द्ध्य: 'बुद्ध्यति'. Wait, let's look at "बुद्ध्यति": द् + ध = द्ध, then य attached = द्ध्य. So "बुद्ध्यति". Wait, then: "भूत रूपेयम्" or "भूतरूपेयं"? Look at line 28: "भूत" space "रूपेयम्" - wait, is there a space? "भूत रूपेयम्" or "भूतरूपेयं"? There is a space: "भूत रूपेयम्". Then "केवलशक्तिरूपेयं वा ?" Wait, look at bottom of page 210: There is an ornament: ~ * ~ or something, like « ० ».

Let's check Right page (211): Line 30: "इत्यद्यापि विचारयत्येव । श्रुतिस्तु तस्या इन्द्ररूपतां सूर्याद् भरणीयतां" Wait, "सूर्याद् भरणीयतां" or "सूर्याद्भरणीयतां"? There is a space: "सूर्याद् भरणीयतां". Line 31: "स्पष्टैः शब्द