वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)

वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)
Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
DevanagariHindipublished237 पृष्ठ
पृष्ठ 35, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 35
... Wait, look at the word: शास्त्रप्रामाण्यम्+अनभ्युपगच्छ... ग च्छ ता म् अ पि? Wait, look at line 14: शास्त्रप्रामाण्यमनभ्युपगच्छतांWait, let's read:ग च्छ त म्- wait, does it haveताम्? Look at: ग च्छ त्व म प्या प त्ति ष्य ति? No, आपत्स्यतिorआपत्तिष्यति? Let's read letter by letter: आ प ति ष्य ति! There is only one तinआपतिष्यति? Wait, let's look: आ प ति ष्य तिorआ प त्ति? There is a त्! आ प त्स्य ति? Look at आपत्स्यति: आ(आ)प(प)त्स्य(त् + स + य = त्स्य)ति(ति) ->आपत्स्यति! Yes! आपत्स्यति! In Sanskrit, the future tense of आ-पद्`