भारतकोश
वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedanta Paribhasha Hindi

धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा

स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
आकांक्षा पदों के अर्थ और उनके लक्षणों का निरूपण१६१
इसी प्रसंग में बलाबलाधिकरण पर विचार१६५
आकांक्षा के लक्षण पर शंका-समाधान१६८
योग्यता का लक्षण और उस पर विचार२०२
आसत्ति का लक्षण और उस पर विचार२०४
पदार्थ के दो भेद२०७
पद की शक्ति पर विचार२१०
लक्ष्यपदार्थ के निरूपण की प्रतिज्ञा और लक्षणा पर विचार२२१
शक्यपरंपरासम्बन्धरूप द्वितीय लक्षणा का प्रकार२२३
लक्षितलक्षणा में गौणी का अन्तर्भाव२२४
प्रकारान्तर से लक्षणा के तीन प्रकार तथा जहल्लक्षणा का स्वरूप और उदाहरण२२५
अजहल्लक्षणा का स्वरूप और उदाहरण२२८
जहदजहल्लक्षणा का स्वरूप और उदाहरण२२८
'सोऽयं देवदत्तः' 'तत्त्वमसि' में अपना मत२३०
विशिष्ट वाचक पद में केवल विशेषण की उपस्थिति लक्षणा से होती है२३२
तत्त्वमसि आदि वाक्यों में लक्षणा के बिना ही अखण्डार्थ की उपपत्ति२३३
लक्षणा के तीन प्रकार बताने का उपयोग२३५
लक्षणा में बीज२३६
लक्षणा वाक्य में भी होती है२३८
इस पर शंका-समाधान२३६
लौकिक वाक्य के समान वैदिक वाक्य में भी लक्षणा होती है२४०
वाक्यैकवाक्यता२४३
आसत्ति में शाब्दबोध की हेतुता२४४
तात्पर्य-निरूपण२४५
अद्वैतियों का तात्पर्य लक्षण२४७
उस पर शंका समाधान२४६
तात्पर्यनिराकरणपरक विवरणवाक्य के आशय का उद्घाटन२५४
रत्नकार के मत से तात्पर्यनिरसनपरक विवरणग्रन्थ की उपपत्ति२५५
तात्पर्यज्ञान किससे होता है ?२५६
सिद्धार्थप्रतिपादक वाक्यों की भी प्रामाणिकता२५८
वेदप्रामाण्य की स्थापना के लिये नैयायिक तथा मीमांसकों के मतों का प्रतिपादन२५६