वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedanta Paribhasha Hindi
धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा
स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)
DevanagariHindipublished482 पृष्ठ
पृष्ठ 54, कुल 482 में से
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| विषय | पृष्ठ |
|---|---|
| वेदप्रामाण्य पर ग्रन्थकार का मत और उस पर शंका-समाधान | २६० |
| अपने सिद्धान्त की स्पष्टता | २६५ |
| अर्थापत्ति-परिच्छेदः | |
| अर्थापत्ति-निरूपण की प्रतिज्ञा और उसका लक्षण | २६६ |
| एक ही अर्थापत्ति शब्द, प्रमा और प्रमाण का वाचक है | २६७ |
| अर्थापत्ति के दो भेद और दृष्टार्थापत्ति का उदाहरण | २६८ |
| श्रुतार्थापत्ति का लक्षण और उदाहरण | २६९ |
| श्रुतार्थापत्ति के अवान्तर भेद | २७० |
| उस पर शंका-समाधान | २७२ |
| अभिहितानुपपत्तिरूप श्रुतार्थापत्ति का लक्षण और उदाहरण | २७३ |
| व्यतिरेक-व्याप्ति से अर्थापत्ति की अचरितार्थता | २७४ |
| उस पर शंका-समाधान | २७६ |
| नैयायिकों के व्यतिरेकी अनुमान का अनावश्यकता | २७७ |
| अनुपलब्धि-परिच्छेदः | |
| अनुपलब्धि प्रमाण के निरूपण की प्रतिज्ञा और उसका लक्षण | २७८ |
| उस पर शंका-समाधान | २८२ |
| योग्यानुपलब्धि में योग्यता के स्वरूप में अनेक विकल्पपूर्वक प्रश्न | २८३ |
| उनका समाधान | २८५ |
| अनुपलब्धि को पृथक् प्रमाण मानने पर शंका-समाधान | २८८ |
| अभाव के चार प्रकार | ३०० |
| प्रध्वंसाभाव का निरूपण | ३०१ |
| उस पर शंका-समाधान | ३०३ |
| अत्यन्ताभाव का निरूपण | ३०५ |
| अन्योन्याभाव का निरूपण | ३०६ |
| अन्योन्याभाव के भेद | ३०९ |
| उस पर शंका-समाधान | ३१० |
| अभाव की चतुर्विधता पर पूर्वाचार्यों की सम्मति | ३१२ |
| स्वतः प्रामाण्यवाद | ३१४ |
| अप्रामाण्य की परतोग्राह्यता | ३२३ |
| विषय-परिच्छेदः | |
| प्रमाणों में प्रामाण्य के दो प्रकार | ३२६ |
| 'तत्' पदार्थ के निरूपण की प्रतिज्ञा और लक्षण के दो प्रकार तथा स्वरूपलक्षण की परिभाषा तथा उस पर शंका-समाधान | ३२७ |