भारतकोश
वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedanta Paribhasha Hindi

धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा

स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
तटस्थ लक्षण की परिभाषा३२८
कर्तृत्व की परिभाषा३२६
ज्ञान, इच्छा, कृति—तीनों मिलकर एक लक्षण नहीं हैं३३०
ब्रह्म का लघु लक्षण३३२
उस पर शंका-समाधान३३३
जगत् के जन्मक्रम और सूक्ष्म भूतों के गुणों का निरूपण३३४
शब्द केवल आकाश का गुण नहीं है३३६
इन्द्रियादि सृष्टि का निरूपण३३७
पञ्च कर्मेन्द्रियाँ और प्राणों की उत्पत्ति३३८
स्थूल महाभूतों की उत्पत्ति और पंचीकरण का प्रकार३३६
लिङ्ग ( सूक्ष्म ) शरीर की उत्पत्ति३४०
चतुर्विध स्थूल शरीरों की उत्पत्ति३४१
ईश्वर में समस्तजगत्कर्तृत्व का निरूपण३४२
शंका-समाधान के द्वारा निद्रित और मृत मनुष्य में अन्तर३४५
प्राकृत प्रलय का निरूपण३४६
नैमित्तिक प्रलय३४८
प्राकृत प्रलय और नैमित्तिक प्रलय में प्रमाण३४८
आत्यन्तिक प्रलय३४६
प्रलय के क्रम का निरूपण३५०
ब्रह्म का तटस्थ लक्षण३५१
ब्रह्म के जगत्कारणात्मक लक्षण पर शंका-समाधान३५२
सृष्टिवाक्यों का तात्पर्य३५२
उपासनादि वाक्यों का तात्पर्य-निरूपण३५४
ईश्वर और जीव के स्वरूप का निरूपण३५५
( प्रतिबिम्बवाद ) 'अनेक जीववाद' पक्ष में दोष होने से अन्य मत-प्रदर्शन३५६
एकजीववाद पक्ष पर कुछ आक्षेप और उनका निराकरण३५८
सिद्धान्ती के द्वारा प्रदर्शित दृष्टान्त पर शंका-समाधान और 'तत्' पदार्थ के निरूपण की समाप्ति३५६
'त्वं' पदार्थ का निरूपण३६०
जीव की तीन अवस्थाओं का निरूपण३६०
अन्तःकरण वृत्ति के अङ्गीकार में मतभेद३६१