भारतकोश
वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedanta Paribhasha Hindi

धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा

स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
वृत्ति की आवश्यकता पर दूसरा मत
उस पर शंका-समाधान३६५
ग्रन्थकार द्वारा इसी मत का स्पष्टीकरण३६६
इस मत में अभियुक्तों की संमति"
अपरिच्छन्न पक्ष में भी वृत्ति की सम्बन्धार्थता३६७
परिच्छिन्न पक्ष में वृत्ति की संबन्धार्थता३६८
उस पर शंका-समाधान३६९
स्वप्नावस्था का निरूपण३७०
सुषुप्ति का लक्षण"
मरण और मूर्च्छा अवस्थाओं का विवेचन३७१
जीव के सम्बन्ध में पुनर्वििवेचन"
जीव की स्वयं प्रकाशता३७२
'तत्' और 'त्वम्' दोनों का ऐक्य"
इस पर शंका और समाधान३७३
पूर्वपक्षी के बताये गये अनुमान की व्यवस्था३७५
पूर्वपक्षी के किये गये आगम प्रमाण की व्यवस्था३७६
जीवात्मा और परमात्मा का ऐक्य मानने पर उनकी विरुद्धधर्माश्रयता की उपपत्ति३७६
जीव पर कर्तृत्व के आरोप पर शंका-समाधान३७७
इस पर पूर्वपक्षी का पुनः प्रश्नोत्तर३७८
विषय-परिच्छेद का उपसंहार३८०

प्रयोजन-परिच्छेदः

विषयपृष्ठ
वेदान्तशास्त्र के प्रयोजन का निरूपण३८१
प्रयोजन का लक्षण'
प्रयोजन की द्विविधता"
मोक्ष का स्वरूप३८२
मोक्ष के सम्बन्ध में शंका-समाधान३८३
मोक्ष का साधन केवल ज्ञान ही हैं३८४
उक्त ज्ञान का विषय जीव ब्रह्म की एकता है"
यह ज्ञान अपरोक्ष है, परोक्ष नहीं३८५
अपरोक्ष ज्ञान के साधनों में मतभेद"
इस सम्बन्ध में पद्मपादाचार्य का मत"