भारतकोश
वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्त परिभाषा (गजानन शास्त्री मुसलगांवकर हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedanta Paribhasha Hindi

धर्मराजाध्वरीन्द्र द्वारा

स्रोत: Vedanta Paribhasha with Hindi Commentary by Pt. Gajanan Shastri Musalgaonkar (उद्गम)

DevanagariHindipublished482 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
स्वाप्नपदार्थ विचार१२१
स्वाप्नपदार्थों के शुद्धचैतन्य पर आरोप के अनौचित्य की आशंका१२६
कार्यविनाश की द्विविधता बताते हुए उसका समाधान१३०
प्रातिभासिकसत्ता के स्वीकार करने पर निषेध की अनुपपत्ति और व्यधिकरणधर्मावच्छिन्न-प्रतियोगिताक-अभाव के स्वीकार करने पर उक्त अनुपपत्ति का निरास१३४
इसी प्रसंग पर कुछ शंका-समाधान१३७
उक्त प्रत्यक्ष के प्रकारान्तर से पुनः दो विभाग१४२
पाँच इन्द्रियाँ१४३

अनुमान-परिच्छेदः

विषयपृष्ठ
अनुमान-प्रमाण के निरूपण की प्रतिज्ञा तथा अनुमान का लक्षण१४८
असाधारण कारणत्वरूप का खण्डन१५०
अनुमिति में व्याप्तिज्ञान की करणता पर शंका-समाधान१५४
उद्बुद्ध संस्कार से ही अनुमिति होती है१५६
अनुमिति में व्याप्तिस्मरण आदि की हेतुत्वेन कल्पना का खण्डन१५८
'पर्वतो वह्निमान्' इत्याकारक अनुमित्यात्मक ज्ञान का खण्डन१६०
व्याप्तिस्वरूप का उपपादन१६१
अनुमान की त्रिविधता का अनंगीकार१६३
अनुमान के दो भेद१६६
प्रकृत में अनुमान का उपयोग१६८
मिथ्यात्व का लक्षण१६६
मिथ्यात्व में अनुमान प्रमाण१७२
मिथ्यात्व के अनुमान पर शंका-समाधान१७४
पूर्वोक्त समाधान में अरुचि होने पर दूसरा समाधान१७६

उपमान-परिच्छेदः

विषयपृष्ठ
उपमान प्रमाण के निरूपण की प्रतिज्ञा तथा उपमान प्रमाण का लक्षण१७६
उपमान को स्वतन्त्र प्रमाण मानने की आवश्यकता१८२

आगम-परिच्छेदः

विषयपृष्ठ
आगमप्रमाण (शब्दप्रमाण) के निरूपण की प्रतिज्ञा तथा उसका लक्षण और प्रमाणभूत वाक्य का लक्षण तथा उसकी शाब्द बोध में कारणता१८७