वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 169, कुल 314 में से
संदर्भ में पढ़ेंअज्ञान निरूपण १५५
होता है। अथवा-जिसप्रकार जलों की समष्टि की विवक्षा से 'जलाशय' ऐसा (व्यवहार करते हैं)। ठीक उसीप्रकार अनेकसंख्या में प्रतीत होने वाले जीवों में स्थित अज्ञानों की समष्टि का कथन करने की आकाङ्क्षा से उनमें एकत्व का व्यवहार किया जाता है। 'अजन्मा एक' इत्यादि श्रुति के (कथन का आधार समष्टि ही है)। 'चन्द्रिका'-वेद एवं उपनिषद्ग्रन्थों में अज्ञान के लिए 'अजामेकां' इत्यादि वचनों में एकवचन का तथा 'इन्द्रो मायाभिः' इत्यादि श्रुतिवाक्यों में बहुवचन का प्रयोग किया है। अतः वास्तविकता से परिचित होने के लिए जिज्ञासा स्वाभाविक है। इसी की शान्ति के लिए ग्रन्थकार ने यहाँ समष्टि-व्यष्टि अभिप्राय से अज्ञान के दो रूपों का उल्लेख किया है। 'समष्टि' शब्द का प्रयोग यहाँ समुदाय, समूह या संघात अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए हुआ है तथा 'व्यष्टि' यहाँ एक का सूचक है। इसप्रकार दूसरे शब्दों में समष्टि-व्यष्टि क्रमशः सामान्य और विशेष व्यवहार के वाचक हैं। वस्तुतः दोनों में अभेद है। ठीक उसीप्रकार जैसे-एक आम के वृक्ष का कथन करने के लिए हम कहेंगे-'यह आम का पेड़ है'। जबकि आम के बहुत से पेड़ों के समुदाय के लिए कहा जाएगा-'यह आम का 'वन' है'। अतः यहाँ इसे व्यष्टि अभिप्राय से 'वृक्ष' तथा समष्टि अभिप्राय से 'वन' कहना होगा। इसीप्रकार एक जीव में स्थित अज्ञान का कथन उसके व्यष्टिरूप को तथा अनेक जीवों में स्थित अज्ञान को कहने के लिए उसके समष्टिस्वरूप को अभिव्यक्त करेगा, किन्तु ये दोनों तत्त्व की दृष्टि से अभिन्न ही होंगे। वेदान्तदर्शन में समष्टि एवं व्यष्टि इन दोनों शब्दों का अनेकशः प्रयोग किया गया है। वेदान्त में प्रतिपादित सृष्टिप्रक्रिया को समझने के लिए भी इन दोनों शब्दों को अथवा समष्टि-व्यष्टि विषयक इस सिद्धान्त को समझना आवश्यक है। हमने भूमिका में (पृष्ठ 82) पर इस विषय में विस्तारपूर्वक चर्चा की है। अतः इसके विस्तृत अध्ययन के लिए उसका अवलोकन आवश्यक है। इस प्रसङ्ग में ग्रन्थकार के अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए हम केवल इतना ही कहना चाहेंगे कि जिसप्रकार वृक्षों के समूह का कथन करने की दृष्टि से 'वन' कहकर एक संख्यासूचक शब्द का व्यवहार किया जाता है।