वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
सदानन्द योगीन्द्र द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 258, कुल 314 में से
संदर्भ में पढ़ें२४४ वेदान्तसार पदच्छेद-अत्र 'शोणः धावति' इति वाक्यवद् 'अजहल्लक्षणा' अपि न सम्भवति। तत्र शोण-गुण-गमन-लक्षणस्य वाक्यार्थस्य विरुद्धत्वात्, तद् अपरित्यगेन तद् आश्रय-अश्वादिलक्षणया तद् विरोध-परिहारसम्भवाद्, अजहल्लक्षणा सम्भवति। अत्र तु परोक्षत्व-अपरोक्षत्वादिविशिष्टचैतन्य-एकत्वस्य वाक्यार्थस्य विरुद्धत्वात् तद् अपरित्यगेन तत् सम्बन्धिनः यस्य कस्यचिद् अर्थस्य लक्षितत्वे अपि तद् विरोध-परिहार-असम्भवाद् अजहल्लक्षणा न सम्भवति एव। न च तत् पदम् त्वम् पदम् वा स्वार्थविरुद्ध-अंशपरित्यागेन अंशान्तर-सहितम् त्वम् पदार्थम् तत् पदार्थम् वा लक्षयतु, अतः कथम् प्रकारान्तरेण भागलक्षणा-अङ्गीकरणम् इति वाच्यम्। एकेन पदेन स्वार्थांश-पदार्थान्तर-उभय लक्षणायाः असम्भवात्, पदान्तरेण तद् अर्थप्रतीतौ लक्षणया पुनः तत् प्रतीतिः अपेक्षा अभावात् च॥26॥ अनुवाद-यहाँ (तत्त्वमसि इत्यादि वाक्य में) 'लाल' दौड़ रहा है' इत्यादि वाक्य के समान 'अजहल्लक्षणा' (करना) भी सम्भव नहीं है। (क्योंकि) वहाँ लालगुण का गमनरूप जो वाक्यार्थ है, असंगत है। अतः (उसकी संगति हेतु) उस अर्थ का परित्याग किए बिना, उसके आश्रयभूत अश्वादि में लक्षणा द्वारा अर्थ करके उस विरोध का परिहार हो जाता है (अतः इस वाक्य में) अजहल्लक्षणा सम्भव है। जबकि (तत्त्वमसि इत्यादि वाक्य में) तो परोक्षत्व एवं अपरोक्षत्व आदि विशिष्ट (दो) चैतन्यों की एकता, अभिन्नवाक्यार्थ के विरुद्ध होने के कारण उसका परित्याग किए बिना उससे सम्बन्धित जिस किसी भी अर्थ की लक्षणा से प्रतीति होने पर भी, उस विरोध का परिहार असम्भव होने से, अजहल्लक्षणा भी सम्भव नहीं है। (और यदि यह कहा जाए कि) 'तत्' अथवा 'त्वम्' पद अपने अर्थ में विरुद्ध अंश का परित्याग करके, दोनों में सामान्य (चैतन्य) रूप अंश सहित त्वम् एवं तत् पदों के अर्थ को लक्षणा से प्रदर्शित करें, (तो भी ठीक नहीं), क्योंकि तब तो (हमारे द्वारा कथित) भागलक्षणा को ही प्रकारान्तर से क्यों न स्वीकार कर लिया जाए? (क्योंकि) एक पद द्वारा अपने (विरुद्ध) अंश का परित्याग करके तथा दूसरे पद के अविरुद्ध अर्थ की प्रतीति दोनों कार्यों में लक्षणा (एक साथ)