भारतकोश
वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara by Sadananda Yogindra

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished145 पृष्ठ

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( १२ ) वेदान्तसार । ( भा०टी० ) जिस प्रकार कर्म्मानुसार प्राप्त होनेवाला इस संसारका माला चन्दनादि भोग अनित्य है इसी प्रकार के अनुसार प्राप्त होनेवाला परलोकका ( स्वर्गादिका ) अमृ- तादि भोगभी अनित्य है इस प्रकार अत्यन्त दोनों लोकोंके भोगकी इच्छाकी निवृत्तिही कल्याण करनेवाली है इस प्र- कारके बुद्धिको इहामुत्रफलभोगविराग कहतेहैं ॥ १० ॥ शमदमादयस्तु शमदमोपरतिति तिक्षासमाधानश्रद्धाः ॥ ११ ॥ ( भा०टी० ) अब शमदमादिका निरूपण करतेहैं- शम, दम, उपरति, तितिक्षा, समाधान, और श्रद्धा, इनको शमदमादि नामसे व्यवहार करतेहैं ॥ ११ ॥ शमस्तावत् श्रवणादिव्यतिरिक्त विषयेभ्यो मनोनिग्रहः ॥ १२ ॥ ( सं०टी० ) तत्र शमं लक्षयति। शमस्तावदिति। तथा तीव्रायां बुभुक्षायां भोजनादन्यो व्यापारो मनसो न रोचते भो- जने विलंबं न सहते तथा स्रक्चन्दनादिविषयेष्वत्यंतमरुचिः। तत्त्वज्ञानसाधनेषु श्रवणमननादिष्वत्यंतमभिरुचिर्जायते तदा पूर्ववासनाबलाच्छ्रवणादिसाधनेभ्य उड्डीयमानंस्रक्चन्दनादि विषयेषु गम्यमान मनः येनांतःकरणवृत्तिविशेषेण निवर्त्यते स शम इत्यर्थः ॥ १२ ॥ ( भा०टी० ) ईश्वरविषयक श्रवण, मनन, निदिध्यासन-