भारतकोश
वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (नृसिंहसरस्वती टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara by Sadananda Yogindra

सदानन्द योगीन्द्र द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 145 में से

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( ४२ ) वेदान्तसार । नेन्द्रिय आकाशादिके सात्विक अंशसे उत्पन्न होती हैं। तेज- के सात्विक अंशसे नेत्र अकाशके सात्विक अंशसे कर्ण पृ- थ्वकि सात्विक अंशसे नासिका जलके सात्विक अंशसे जि- ह्वा वायुके सात्विक अंशसे त्वचा उत्पन्न होते हैं। निश्चया- त्मक अन्तःकरणकी वृत्तिका नाम बुद्धि है। संकल्पविकल्पा- त्मक अन्तःकरणकी वृत्तिका नाम मन है ॥ ४१ ॥ अनयोरेव चित्ताहंकारयोरन्तर्भावः । अनुसन्धाना- त्मिकान्तःकरणवृत्तिश्चित्तम् । अभिमानात्मिका- न्तःकरणवृत्तिरहंकारः । एते पुनराकाशादिगतसा- त्विकांशेभ्योमिलितेभ्य उत्पद्येते। एतेषां प्रकाशा- त्मकत्वात्सात्विकांशकार्य्यत्वम् ॥ ४२ ॥ (सं०टी०) स्मरणात्मकचित्तस्य गर्वात्मकाहंकारस्य च बुद्धिमन्सोरंतर्भाव इत्याह । अनयोरेवेति । यद्यप्यंतःक- रणत्वेन चतुर्णामेकत्वं तथाप्येकस्यैव पुरुषस्य पाचकः पा- ठक इत्यादिवृत्तिभेदाद्भेदेवदेकस्याप्यंतःकरणस्य निश्चयसंशय स्मरणाहंकारविषयभेदैर्बुद्ध्यादिभेदइत्यर्थः । बुद्ध्यादीनामुत्प- त्तिप्रकारं दर्शयति । एते पुनरिति । एतेषां चतुर्णां सात्विकां- शेभ्यो भूतेभ्य उत्पत्तौ निमित्तमाह। एतेषामिति । बुद्ध्यादीनां प्रकाशात्मकत्वात्सात्विकांशभूतकार्यत्वमित्यर्थः ॥ ४२ ॥ (भा०टी०) चित्त और अहंकार यह दोनों बुद्धि और मनके अन्तर्गत दो प्रकारकी वृत्ति हैं। अनुसन्धानात्मक अ- न्तःकरणकी वृत्तिका नाम चित्त है। और अभिमानसहित जो