वेणीसंहारम् (भट्ट नारायण - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Venisamhara Nataka of Bhatta Narayana with Commentary
भट्ट नारायण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थोऽङ्कः ] प्रबोधिनी-प्रकाश-द्वयोपेतम् १५६ कष्टम् ( निश्वस्य । ) मदकलितकरेणुभज्यमाने विपिन इव प्रकटैकशालशेषे । हतसकलकुमारके कुलेऽस्मिस्त्वमपि विधेरपलोकितः कटाक्षैः ॥ ३ ॥ ( आकाशे लक्ष्यं बद्ध्वा ) ननु भो हतविधे, भरतकुलविमुख, अक्षतस्य गदापाणेरना रूढस्य संशयम् । अन्वयः - मदकलितकरेणुभज्यमाने, प्रकटैकशालशेषे, विपिने, इव, हतसकल- कुमारके, अस्मिन्, कुले, त्वम्, अपि, विधेः, कटाक्षैः अवलोकितः ॥ ३ ॥ मदकलितकरेणुभज्यमाने = मदेन कलितः व्याप्तो यः करेणुः हस्ती तेन भज्य- माने संमृद्यमाने, प्रकटैकशालशेषे = प्रकटः एकशालः एकमात्रवृक्षः शेषः अवशिष्टः यत्र तस्मिन्, विपिने = वने, इव । कुरुकुले एक एव दुर्योधनोऽवशिष्टः सर्वे च भीमेन विनाशिता इति भावः । हतसकलकुमारके = व्यापादितसकलराजपुत्रे, अस्मिन् कुले त्वं = महाराजदुर्योधनः, विधेः = दैवस्य, कटाक्षैः = भ्रूभङ्गैः, अवलो- कितः, किं त्वमपि चेतनतां न लप्स्यस इति भावः । अत्र पूर्णोपमाऽलङ्कार पुष्पि- ताग्रा छन्दः ॥ ३ ॥ हतविधे हतभाग्य दुर्भाग्येत्यर्थः । अन्वयः - गदापाणेः, अक्षतस्य, संशयम्, अनारूढस्य, भीमसेनस्य, एषा, अपि, प्रतिज्ञा, त्वया, पूर्यते ॥ ४ ॥ दुर्योधनस्य मूर्च्छा विलोक्य तस्य मरणं सन्दिहान आह - अक्षतस्येति । गदा- पाणेः = गदाधारिणः, अक्षतस्य = प्रहारानभिहतस्य संशयं = प्रतिज्ञापूर्त्यर्थं प्रवृत्ते युद्धे गदायुद्धकुशलो दुर्योधनो मां हनिष्यति अथवा मम प्रतिज्ञा पूर्णा भविष्यती- दुःख की बात है ! ( आह भरकर ) मदोन्मत्त गजराज के द्वारा जङ्गल के ध्वस्त कर देने पर जिस प्रकार एक दो वृक्ष ही कहीं पर अवशिष्ट दिखलाई पड़े उसी प्रकार इस कुरुवंश के सम्पूर्ण राजकुमारों के नाश हो जाने पर एक मात्र अवशिष्ट आप [दुर्योधन] दुर्देव के नेत्रों से देखे जा रहे हैं । अर्थात् जिस प्रकार एक पागल हाथी विशाल और गम्भीर वन में घुस कर उसके सभी वृक्षों को तोड़ कर नष्ट कर डाले और बड़ी कठिनाई से एक दो वृक्ष बच जायें उसी प्रकार इस मतवाले भीम के द्वारा कुरुवंश के सभी राजकुमारों का संहार हो चुका और केवल आप [ दुर्योधन ] जीते हुए बच गये हैं दुर्देव की दृष्टि आप पर भी पड़ रही है कदाचित् आपको भी न समाप्त कर दे ॥ ३ ॥ ( आकाश की ओर देखकर ) ऐ भरतवंश के रुष्ट और क्रूर विधाता ? भीमसेन के हाथ में गदा है। इनको कोई क्षति भी नहीं हुई। इन्हें किसी प्रकार के