भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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पृष्ठ 5

निवेदन

‘विदुरनीति’ महाभारतका एक अत्यन्त प्रसिद्ध और परम उपादेय प्रसङ्ग है। इसमें महामना विदुरजीने राजा धृतराष्ट्रको लोक-परलोकमें कल्याण करनेवाली बहुत-सी बातें समझायी हैं। उद्योगपर्वके आठ अध्याय ३३वेंसे ४०वेंतक इस प्रसङ्गके हैं। विदुरनीतिपर संस्कृत टीकाएँ भी हैं। इसमें व्यवहार, बर्ताव, नीति, सदाचार, धर्म, सुख-दुःख-प्राप्तिके साधन, त्याज्य और ग्राह्य गुणों तथा कर्मोंका निर्णय, त्यागकी महिमा, न्यायका स्वरूप, सत्य, परोपकार, क्षमा, अहिंसा, मित्रके लक्षण, कृतघ्नकी दुर्दशा, निर्लोभता आदिका विशद वर्णन करते हुए राजधर्मका सुन्दर निरूपण किया गया है। यह पुस्तक अपठित, विद्वान्, तरुण, वृद्ध, बालक, स्त्री, शासक, प्रजा, धनी, गरीब, विद्यार्थी, शिक्षक, सेवावर्ती और शुद्ध तथा सुखी जीवनका निर्माण चाहनेवाले प्रत्येक व्यक्तिके कामकी है। श्लोकोंका अर्थ बड़ी सरल भाषामें किया गया है। आशा है, इससे भारतके सभी वर्गों तथा श्रेणियोंके नर-नारी लाभ उठावेंगे।

श्रावण कृष्ण ८, वि० २०११
गोरखपुर

निवेदक—
हनुमानप्रसाद पोद्दार