विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)
Vidura Niti Gita Press
महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished172 पृष्ठ
पृष्ठ 6, कुल 172 में से
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श्रीहरिः
विदुरनीतिके प्रधान विषयोंकी सूची
पहला अध्याय
| श्लोक | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| १—६ | धृतराष्ट्रकी आज्ञासे द्वारपालका विदुरजीको बुलाकर उनके पास पहुँचाना | २१-२२ |
| ७-८ | विदुरका चिन्तामग्न धृतराष्ट्रसे अपने बुलानेका कारण पूछना | २२-२३ |
| ९-१२ | धृतराष्ट्रका विदुरको अपनी चिन्ता बताकर उनसे श्रेयका उपाय पूछना | २३-२४ |
| १३-१९ | किन दोषोंके कारण मनुष्यको चिन्ता और जागरण करने पड़ते हैं, यह बताकर विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरके प्रति किये गये अन्यायके लिये उलाहना देना | २४-२६ |
| २०-३४ | पण्डित एवं पाण्डित्यका लक्षण | २६-२९ |
| ३५-४४ | मूढ़की पहचान | २९-३१ |
| ४५ | पण्डित किसे कहते हैं | ३१ |
| ४६ | घरके लोगोंको न बाँटकर अकेले उत्तम अन्न-वस्त्रका उपभोग करनेकी निन्दा | ३१-३२ |
| ४७ | कर्ता ही दोषका भागी होता है | ३२ |
| ४८-४९ | बुद्धिकी प्रबलता और उसका सदुपयोग | ३२ |
| ५० | मन्त्रविप्लवसे हानि | ३३ |
| ५१ | अकेला क्या-क्या न करे | ३३ |
| ५२ | सत्यकी प्रशंसा | ३३ |
| ५३-५६ | क्षमाकी प्रशंसा | ३३-३४ |
| ५७ | धर्म, क्षमा, विद्या और अहिंसाकी प्रशंसा | ३४ |
| ५८ | पृथ्वी किन दो व्यक्तियोंको खा जाती है | ३४ |