भारतकोश
विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

विदुर नीति (महाभारत उद्योग पर्व - गीताप्रेस गोरखपुर)

Vidura Niti Gita Press

महात्मा विदुर / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished172 पृष्ठ

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( ५ )

श्लोकविषयपृष्ठ
५९कटुवचन न बोलने और दुष्टोंका आदर न करनेकी प्रशंसा३५
६०दूसरोंके विश्वासपर चलनेवाले दो प्रकारके व्यक्ति३५
६१दो काँटे३५
६२किन दो व्यक्तियोंकी शोभा नहीं होती३५
६३दो स्वर्गसे भी ऊँचे स्थान पानेवाले व्यक्ति३५-३६
६४धनके दो दुरुपयोग३६
६५किन दोको पानीमें डुबो देना चाहिये३६
६६सूर्यमण्डलका भेदन करनेवाले दो पुरुष३६
६७-६८त्रिविध उपाय और पुरुष३६-३७
६९धनके तीन अनधिकारी३७
७०तीन विनाशकारी दोष३७
७१नरकके तीन द्वार३७
७२शत्रुके सङ्कटसे छूटना बलप्राप्ति, राज्य-प्राप्ति और पुत्र-प्राप्ति—तीनोंके बराबर है३७
७३तीन प्रकारके शरणागतोंका त्याग न करे३८
७४राजाके द्वारा त्यागनेयोग्य चार प्रकारके मनुष्य३८
७५घरमें रहनेयोग्य चार प्रकारके मनुष्य३८
७६-७७तत्काल फल देनेवाली चार बातें३८-३९
७८भयको दूर करनेवाले चार कर्म३९
७९सेवन करनेयोग्य पाँच अग्नि४०
८०पाँचकी पूजासे विशुद्ध यशकी प्राप्ति४१
८१राजाके पीछे लगे रहनेवाले पाँच व्यक्ति४०
८२पाँच इन्द्रियोंमेंसे एकके भी दोषयुक्त होनेसे हानि४०
८३-८५त्याग देनेयोग्य छः दोष और छः प्रकारके व्यक्ति४०-४१
८६-८७त्याग न करनेयोग्य छः गुण और जीवलोकके छः सुख४१