भारतकोश
विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

विक्रमाङ्कदेवचरितम् (कल्याणी चालुक्य साम्राज्य इतिहास - सटीक)

Vikramankadeva Charitam of Bilhana with Commentary

महाकवि बिल्हण / पं. विश्वनाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished493 पृष्ठ

पृष्ठ 282, कुल 493 में से

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पृष्ठ 282

( २६६ ) भाषा वह सोमदेव माङ्गलिक वाद्यविशेषो के शब्दो से मानो बहिरा होकर कुल- वृद्ध महानुभावो के सदुपदेशो को बिलकुल नही सुनता था ।- कुर्वन्नङ्गेषु वैक्लव्यमाविष्कृतमदज्वरः । स निनाय श्रियं राजा राजयक्ष्मेव संक्षयम् ॥१००॥ अन्वयः आविष्कृतमदज्वरः सः राजा राजयक्ष्मा इव अङ्गेषु वैक्लव्यं कुर्वन् श्रियं संक्षयं निनाय । व्याख्या आविष्कृतः प्रकटीकृतो मदः ज्वर इव मदज्वरो येन स राजा नृपस्सोमदेवो राजयक्ष्मेव क्षयरोग इवाऽङ्गेष्ववयवेषु विक्लवः स्वाङ्गाण्येव धारयितुमशक्तो विह्वलस्तस्य भावो वैक्लव्यं विह्वलत्वं कुर्वन् राजपक्षेऽमात्याद्यङ्गेषु वैक्लव्यं राज्ञ्क सम्बन्धराहित्यं वैमनस्यमित्यर्थः कुर्वन् सम्पादयन् श्रियं राजलक्ष्मीं, राजयक्ष्मापक्षे शोभां संक्षयं विनाशं निनाय नयति स्म । यथा क्षयरोगः पूर्वं ज्वरं समुत्पाद्य शोषिणोऽवयवेषु विक्लबता जनयित्वा तस्य शरीरशोभा नाशयति तथैव मदाप्लुतः सोमदेवोऽमात्यादिराज्याङ्गेषु वैमनस्यरूप वैक्लव्यं जनयित्वा राजलक्ष्मीं नाशयति स्मेति भावः । अत्रोपमालङ्कारः । भाषा अभिमान के समान ज्वर को प्रकट करने वाले क्षयरोग के समान सोमदेव राजा ने (राजयक्ष्मा के पक्ष में) शारीरिक अवयवो में विकलता उत्पन्न कर (राजा के पक्ष में) अमात्य आदि राज्य के अङ्गो में वैमनस्य उत्पन्न कर, शोभा को (पक्ष में) राजलक्ष्मी को नष्ट कर दिया । अर्थात् जिस प्रकार क्षय रोग पहिले ज्वर प्रकट कर शरीर के अङ्ग प्रत्यङ्ग को विह्वल कर शरीर की शोभा को नष्ट कर देता है उसी प्रकार राजा ने मद प्रकट कर मन्त्री आदि राज्य के अङ्गो में वैमनस्य उत्पन्न कर राजलक्ष्मी को नष्ट कर दिया । अपास्तकुन्तलोल्लासा वैराग्यं दधती धरा । जीवत्येव धवे तस्मिन् विधवेव व्यराजत ॥१०१॥

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