विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविनय-पत्रिका ८९ हरिशंकरी पद ( ४९ ) देव— दनुज-वन-दहन, गुन-गहन, गोबिंद- नंदादि-आनंद-दाताऽविनासी। संभु, सिव, रुद्र, संकर, भयंकर, भीम, घोर, तेजायतन, क्रोध-रासी ॥१॥ अनंत, भगवंत, जगदंत-अंतक-त्रास- समन, श्रीरमन, भुवनाभिरामं। भूधराधीस जगदीस ईसान, विज्ञानघन, ज्ञान-कल्याण-धामं ॥२॥ वामनाव्यक्त, पावन, परावर विभो, प्रगट परमातमा, प्रकृति-स्वामी। चन्द्रसेखर, सूलपानि, हर, अनघ, अज, अमित, अविछिन्न, वृषभेस-गामी ॥३॥ नील जलदाभ तनु स्याम, बहुकाम छवि, राम राजीव लोचन कृपाला। कंबु-कर्पूर-वपु, धवल, निर्मल मौलि, जटा, सुर-तटिनि, सित सुमनमाला ॥४॥ वसन किंजल्कधर, चक्र-सारंग-दर- कंज-कौमोदकी अति विसाला। मार-करि मत्त मृगराज, त्रैनैन हर, नौमि अपहरन संसार-जाला ॥५॥ कृष्ण, करुनाभवन, दवन कालीय खल, विपुल कंसादि निर्वंसकारी। त्रिपुर-मद-भंगकर, मत्त गज-चर्मधर, अन्धकोरग-ग्रसन पन्नगारी ॥६॥