भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 124

विनय-पत्रिका ११३ सील-समता-भवन, विषमता-मति-समन, राम रामारमन, रावनारी। खङ्गकर, चर्मवर-वर्मधर, रुचिर कटि तून सर-सक्ति सारंगधारी ॥२॥ सत्यसंधान, निर्वानप्रद, सर्वहित, सर्वगुन-ज्ञान-विज्ञानसाली। सघन-तम-घोर-संसार-भर-सर्वरी- नाम दिवसेस खर-किरनमाली ॥३॥ तपन तीच्छन तरुन तीव्र तापघ्न, तप- रूप, तनभूप, तमपर, तपस्वी। मान-मद-मदन-मत्सर-मनोरथ-मथन, मोह-अंभोधि-मंदर, मनस्वी ॥४॥ वेद-विख्यात, वरदेस, वामन, विरज, विमल, वागीस, वैकुंठस्वामी। काम-क्रोधादिमर्दन, विवर्धन, छमा, सान्ति विग्रह, विहँगराज-गामी ॥५॥ परम पावन, पाप-पुंज-मुंजाटवी- अनल इव निमिष निर्मूलकर्त्ता। भुवन-भूषन, दूषनारि, भुवनेस, भू- नाथ, स्रुतिमाथ जय भुवन-भर्त्ता ॥६॥ अमल, अविचल, अकल, सकल, संतप्त-कलि- विकलता-भंजनानंदरासी। उरग-नायक-सयन, तरुन पङ्कज-नयन, छीरसागर-अयन, सर्ववासी ॥७॥ सिद्ध-कवि-कोविदानंद-दायक पद- द्वंद्व मंदात्ममनुजैर्दुरापं। यत्र संभूत अतिपूत जल सुरसरी दर्शनादेव अपहरति पापं ॥८॥ ८