विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३४ विनय-पत्रिका चिह्न सुशोभित हो रहा है। आप परम ब्रह्मण्य हैं, अत्यन्त धन्य हैं, क्रोध-रहित हैं, अजन्मा हैं, अमित बलशाली और अपार महामहिम हैं ॥५॥ आपके हृदयपर हार, भुजाओंपर बिजायत, हाथोंमें रत्नजटित स्वर्ण-कंकण, कमरमें मणियोंकी करधनी और दोनों चरणोंमें कलहंसके समान शब्द करनेवाले नूपुर हैं। आपका प्रत्येक अंग सुन्दर है और सारा वेष सौन्दर्यमय है ॥६॥ सब प्रकारके सौभाग्यसे युक्त, तीनों लोककी शोभा लक्ष्मीजी आपकी दाहिनी ओर सुशोभित हैं ! आप गंगाजीके समीप उनके तटपर ही सुन्दर मन्दिरमें निवास करते हैं। जो लोग आपका दर्शन करते हैं, वे अत्यन्त धन्य हैं ॥७॥ आप समस्त मंगलोंके घर, घोर संशयोंका शमन करनेवाले, पाप-रूपी वनको भस्म करनेवाले और कष्टोंको हरनेवाले हैं। आप विश्वको धारण करनेवाले, विश्वके हितू, अजेय, इन्द्रियातीत, कल्याणमूर्ति और संसारका सृजन, पालन एवं संहार करनेवाले हैं ॥८॥ आप ज्ञान, विज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्यके खजाना हैं, अणिमादि अष्ट-सिद्धियोंका महादान देनेवाले हैं। हे गरुडगामी श्रीरामजी ! संसाररूपी सर्पसे ग्रसित इस तुलसीदासको बड़ा भय है, रक्षा कीजिये ॥९॥ विशेष १—'दच्छिदिसि रुचिर वारीस कन्या'—परमात्माके प्रत्येक रूपके ध्यानमें शक्तिका ध्यान वाम भागमें किया जाता है; केवल विन्दुमाधवजीके ध्यानसे लक्ष्मीजीका वर्णन दाहिनी ओर किया गया है। आजकल काशीमें विन्दुमाधव- जीके मन्दिरमें लक्ष्मीजी बायीं ओर हैं; किन्तु यह प्रतिमा मस्जिद बननेके बादकी है। गोस्वामीजीके समयमें लक्ष्मीजी दाहिनी ओर थीं। वह मूर्त्ति पड़ोसके एक ब्राह्मणके यहाँ है। मन्दिरपर मुसलमानोंका आक्रमण होनेके पहले उसके पूर्वज उन मूर्त्तियोंको अपने घर उठा ले गये थे। गोस्वामीजीका देहा- वसान जहाँगीर बादशाहके समयमें हुआ था और मन्दिर तोड़े गये थे औरंगजेबके शासनकालमें। उसी मन्दिरके स्थानपर धवरहरा बना हुआ है जो माधवरावके धवरहराके नामसे विख्यात है। यह विन्दुमाधवका मन्दिर तोड़कर बनवाया गया है। अब विन्दुमाधवका मन्दिर इस मस्जिदके बगलमें है। २—'द्विज'—दाँत दो बार निकलते हैं, इसीसे उन्हें द्विज कहते हैं।