भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 389

३७८ विनय-पत्रिका शब्दार्थ—टेरे=पुकारकर। अवडेरे=बेढंगा। हेरे=देखकर । रसाल=आम। बहेरे=बहेड़ा । भावार्थ—हे रामजी ! मेरे लिए तो (बस) आपका नाम ही है। यह बात मैं स्वार्थ और परमार्थके साथियोंसे हाथ उठाकर तथा पुकारकर कहता हूँ ॥१॥ माता-पिताने तो मुझे उत्पन्न करते ही त्याग दिया, ब्रह्माने भी मुझे भाग्यहीन और बेढब-सा बनाया। इतनेपर भी मेरे जैसेको कोई-कोई रामजीका ही कहते हैं, सो किसके नातेसे ? ॥२॥ बिना रामनामके मैं पेटके लिए ललाता फिरा; मुझे देखकर दुःख भी दुःखित था। किन्तु अब नामके प्रसादसे मुझे बबूर और बहेड़ेके वृक्षसे आमके फल मिल रहे हैं। अर्थात् मेरे कर्म तो ऐसे हैं कि मैं बहुत कटु फल पाऊँ, पर राम-नामके प्रसादसे मुझे उन नीच कर्मोंका भी अच्छा फल मिल रहा है; या जो संसार पहले मुझे दुःखमय भास रहा था, वही अब सिया-राममय दिखनेके कारण आनन्दमय प्रतीत हो रहा है ॥३॥ साधु लोग सुन और समझकर नाना प्रकारके यत्नोंसे अपना लोक और परलोक साधते हैं; किन्तु तुलसीको तो एक रामनामका ही अवलम्ब है; जैसे एक गाँठ हो और फेरे बहुतसे हों (इसी प्रकार साधन चाहे जितने हों, पर सबका आधार केवल राम-नाम ही है) ॥४॥ विशेष १—'बबुर बहेरे'—श्री बैजनाथजीने इसका यह अर्थ लिखा है—'बबुर बहेराके वृक्ष तें रसाल फल पायो भाव पूर्व पिशाचै सिद्धि द्वारा भक्ति लाभ भई, यह भक्तमालमें प्रसिद्ध है।' [२२८] प्रिय राम-नाम तें जाहि न रामो। ताको भलो कठिन कलिकालहूँ आदि-मध्य-परिनामो ॥१॥ सकुचत समुझि नाम-महिमा मद-लोभ-मोह-कोह-कामो। राम-नाम-जप-निरत सुजन पर करत छाँह घोर घामो ॥२॥ नाम-प्रभाउ सही जो कहै कोउ सिला सरोरुह जामो। सो सुनि सुमिरि भाग-भाजन भइ सुकृतसील भील भामो ॥३॥