भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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विनय-पत्रिका ४१५ रामका नाम लेनेसे) औरोंकी तो बात ही क्या, तुलसी-सरीखे (पामर) भी तर जाते हैं ॥४॥ विशेष १—'जानिबो तिहारे हाथ'—गुसाईंजीने रामचरितमानसमें भी यही बात लिखी है:— ‘सो जानै जेहि देहु जनाई । जानत तुम्हहि तुम्है है जाई ॥’ २—'छ-मत'—छ शास्त्र; वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्वमीमांसा और उत्तरमीमांसा । १. वैशेषिकके प्रतिपादक कणाद हैं। २. न्यायके प्रतिपादक गौतम हैं। ३. सांख्यके प्रतिपादक कपिल हैं। यथा— ‘कणादेन च संप्रोक्तं शास्त्रं वैशेषिकं महत् । गौतमेन तथा न्यायं सांख्यन्तु कपिलेन तु ॥ ४. योगके प्रतिपादक पतंजलि हैं। ५. पूर्वमीमांसाके प्रतिपादक जैमिनि हैं। ६. उत्तरमीमांसाके प्रतिपादक व्यास हैं। [ २५२ ] बाप ! आपने करत मेरी घनी घटि गई। लालची लबार की सुधारिये बारक बलि, रावरी भलाई सब ही की भली भई ॥१॥ रोगबस तनु, कुमनोरथ मलिन मन, पर-अपवाद मिथ्या-बाद वानी हई। साधन की ऐसी बिधि, साधन बिना न सिधि, विगरी बनावैं कृपानिधि की कृपा नई ॥२॥ पतित-पावन, हित आरत-अनाथनि को, निराधार को अधार दीनबन्धु दई।