भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 463

देखिये ! मैं आपकी बलैया लेता हूँ; आपकी विरदावलीने ही मुझे बाँह (सहारा) और बोल (वचन) देकर बुलाया है ॥६॥ विशेष १—'खलायो'—इसका शाब्दिक अर्थ है 'खलाया', 'पचकाया' । २—'श्रवन-नयन-मन'—ये इन्द्रियाँ बड़ी भयंकर हैं। भगवान् शुक कहते हैं:— जिह्वैकतोऽमुमपकर्षति कर्हि तर्षा- शिश्नोऽन्यतस्त्वगुदरं श्रवणं कुतश्चित् । घ्राणोऽन्यतश्चपलदृक् क्व च कर्मशक्ति- र्बह्व्यः सपत्न्य इव गेहपतिं लुनन्ति ॥ 'एक ओर जिह्वा खींचती है तो दूसरी ओर तृष्णा, इधर कामेन्द्रिय खींच ले जाना चाहती है तो कभी त्वचा और पेटका प्रश्न प्रबल हो उठता है। उससे बचता है तो कानोंके द्वारा खींचा हुआ दूर बह जाता है। वहाँसे चलने भी नहीं पाता कि सुगन्धकी डोरीसे दूसरी तरफ खिंच जाता है। इधरसे छुटकारा भी नहीं हुआ कि ये चपल आँखें दूसरी ही ओर ढकेल ले जाती हैं। जिस तरह एक घरवालेकी बहुतसी स्त्रियाँ हों और वे खींचा-तानीमें उसकी अच्छी तरह मरम्मत करती हैं, वही दशा इस मनुष्यकी है।' ये इन्द्रियाँ इस प्रकार अपनी-अपनी ओर खींचती हैं जैसे एक शरीरको बहुतसी 'सपत्न्य.' सौतें, जिनका वैर जगत्प्रसिद्ध है। गोस्वामीजी कहते हैं कि ये इन्द्रियाँ मुझे जहाँ- जहाँ खींचकर ले गयीं, हर जगह मैं उनपर विश्वास करके चला गया। ३—'सब थल पतितायो'—कुछ प्रतियोंमें 'सब थलपति तायो' पाठ है और कुछमें 'सब थल पतियायो' है। 'सब थलपति तायो' का अर्थ होगा 'सब स्थानोंके स्वामियोंको तपाकर देख लिया (किन्तु कोई भी ऐसा खरा न निकला जो मेरे काम आ सके) ।' किन्तु 'पतियायो' पाठका वही अर्थ है जो 'पतितायो' का। [ २७७ ] राम राय ! बिनु रावरे मेरे को हितु साँचो ? स्वामी-सहित सब सों कहौं, सुनि-गुनि बिसेषि कोउ रेख दूसरी खाँचो ॥१॥