भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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पृष्ठ 52, कुल 475 में से

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पृष्ठ 52

विनय-पत्रिका ४१ खवींकरन = तोड़नेवाले। पाता = रक्षक। वपु = शरीर। भूनन्दिनी = जानकीजी। आकुलित = आर्त्त। विधायी = विधानकर्त्ता। तैलिक यन्त्र = कोल्हू। तमीचर = राक्षस। घालि = डालकर। घटकरन = कुम्भकर्ण। कदन = नाश। सुघट विघटन = सम्भवको असम्भव करने- वाले। विख्यात = प्रसिद्ध। विदुष = पण्डित। भावार्थ—हे हनुमानजी, तुम्हारी जय हो। तुम अंजनीके गर्भरूपी समुद्रसे उत्पन्न होकर चन्द्रमाके समान देवकुलरूपी कुमुदको विकसित करनेवाले हो। तुम अपने पिताके शरीरके सुन्दर नेत्ररूपी चकोरोंको सुख देनेवाले और समस्त लोकोंका शोक-सन्ताप हरनेवाले हो ॥१॥ तुम्हारी जय हो, जय हो। तुमने बचपनमें उदयकालीन प्रचण्ड रवि-मण्डलको लाल खिलौना समझकर निगल लिया था। उस समय तुमने राहु, सूर्य, इन्द्र और उनके वज्रका गर्व तोड़ दिया था। हे शरणागतोंका भय हरनेवाले! हे चौदहो भुवनके स्वामी! तुम्हारी जय हो ॥२॥ हे युद्धक्षेत्रमें धैर्य धारण करनेवाले महावीरजी, तुम्हारी जय हो! तुम श्रीरामजीके हितार्थ देव-शिरोमणि रुद्रके अवतार हो और संसारके रक्षक हो। तुम्हारा शरीर ब्राह्मण, देवता, सिद्ध और मुनियोंके आशीर्वादका साकार रूप है। तुम निर्मल गुण और बुद्धिसागर तथा विधाता हो ॥३॥ हे उचित शिक्षा आदिसे सुग्रीवकी रक्षा करनेमें चतुर हनुमानजी, तुम्हारी जय हो। तुम महापरा- क्रमी बालिके मरवानेके मुख्य कारण हो। तुम समुद्र लाँघते समय सिंहिका नाम- की राक्षसीका मद-मर्दन करनेवाले सिंह हो। निशाचरोंकी लंकापुरीमें उत्पात करनेके लिए केतु हो ॥४॥ हे जानकीजीकी चिन्ताओंको दूर करनेवाले, अशोक वनको उजाड़नेकी नीयतसे निःशंक होकर अपनेको मेघनादके ब्रह्मास्त्रमें बँधवाने- वाले, तुम्हारी जय हो। तुमने अपनी पूँछकी लीला द्वारा आगकी ज्वालमालासे आर्त्त रावणकी लंकापुरीमें होली-दहन-सा मचा दिया था ॥५॥ हे राम और लक्ष्मणको आनन्दित करनेवाले, तुम्हारी जय हो! तुम रीछ और बन्दरोंकी सेना संघटित करनेके विधायक होकर समुद्रपर पुल बाँधनेवाले हो, देवताओंका कल्याण करनेवाले हो और सूर्यकुल-केतु (ध्वजा) श्रीरामजीको संग्राममें विजय-लाभ कराने- वाले हो ॥६॥ तुम्हारी जय हो, जय हो। तुम्हारा शरीर, दाँत, नख और विकट मुँह वज्रके समान हैं। तुम्हारे भुजदंड बड़े प्रचंड हैं। तुम वृक्षों और पर्वतोंको हाथोंसे उठानेवाले हो। तुमने समर-रूपी तेल पेरनेके कोल्हूमें राक्षस-समूह और

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