विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४ विनय-पत्रिका आकर मारा गया। इस प्रकार हनुमानजी उसकी मृत्युके कारण बने। रणमें कुम्भकर्णको बलहीन करनेके भी मूल कारण हनुमानजी ही थे।—लक्ष्मणजीको शक्तिबाणसे मूर्च्छित देखकर हनुमानजी संजीवनी बूटी लानेके लिए धौलागिरि- को ही उठा लाये थे। उस बूटीके द्वारा मूच्र्छा दूर होनेपर लक्ष्मणजीने दूसरे ही दिन मेघनादको मारा था। इससे वह मेघनादके भी वधके कारण माने जाते हैं। १०—'कालनेमिहंता'—यह रावणके पक्षका बड़ा ही मायावी राक्षस था। जब हनुमानजी लक्ष्मणजीके लिए संजीवनी लाने गये थे तो इसने मार्गमें साधुका वेष धारण करके उन्हें छलनेका विचार किया। हनुमानजीको उसकी माया मालूम हो गयी और तुरन्त ही उन्होंने उसकी जान ले ली, इसीसे वह कालनेमिहंता कहलाते हैं। ११—'अघट घटना...विघटन'—समुद्रको लाँघना असम्भव है, किन्तु हनुमानजीने उसे सम्भव कर दिखाया था। पूँछकी आगसे हनुमानजीके भस्म हो जानेकी पूरी सम्भावना थी, पर उन्होंने उस सम्भव कार्यको असम्भव कर दिया और उस आगसे लंकापुरीको जलाकर असम्भवको सम्भव भी कर दिया। ( २६ ) जयति मर्कटाधीस, मृगराज-बिक्रम, महादेव, मुद-मंगलालय, कपाली। मोद-मद-कोह-कामादि-खल-संकुला, घोर संसार-निसि किरनमाली ॥१॥ जयति लसदंजनाऽदितिज, कपि-केसरी- कश्यप-प्रभव, जगदार्त्तिहर्त्ता। लोक-लोकप-कोक कोकनद-सोकहर, हंस हनुमान कल्यान कर्त्ता ॥२॥ जयति सुविसाल-विकराल विग्रह, वज्रसार सर्वांग भुजदंड भारी। कुलिसनख, दसनवर लसत, बालधि वृहद, बैरि-सस्त्रास्त्रधर कुधरधारी ॥३॥