भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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विनय-पत्रिका ४५ जयति जानकी-सोच-संताप मोचन, राम-लछमनानंद-वारिज-विकासी । कीस-कौतुक-केलि लूम-लंका-दहन, दलन कानन तरुन तेजरासी ॥४॥ जयति पाथोधि-पाषान-जलजानकर, जातुधान-प्रचुर-हर्ष-हाता । दुष्ट रावन-कुंभकरन-पाकारिजित- मर्मभित्, कर्म-परिपाक-दाता ॥५॥ जयति भुवनैकभूपन, विभीषन-वरद, विहित कृत राम-संग्राम साका । पुष्पकारूढ़ सौमित्रि-सीता-सहित, भानु-कुल-भानु-कीरति-पताका ॥६॥ जयति पर-जंत्रमंत्राभिचार-ग्रसन, कारमन-कूट-कृत्यादि-हंता । साकिनी-डाकिनी-पूतना-प्रेत- बैताल-भूत-प्रमथ-जूथ-जंता ॥७॥ जयति वेदांतविद विविध-विद्या-विसद, वेद-वेदांगविद ब्रह्मवादी । ज्ञान-विज्ञान-वैराग्य-भाजन विभो, विमल गुन गनसि सुक नारदादी ॥८॥ जयति काल-गुन-कर्म-माया-मथन, निश्चल ग्यान व्रत-सत्यरत, धर्मचारी । सिद्ध-सुरवृंद-जोगींद्र सेवित सदा, दास तुलसी प्रनत भय-तमारी ॥९॥

शब्दार्थ-मर्कटाधीश = बन्दरोंके राजा । मृगराज = सिंह । कपाली = शिवजी । कोह = क्रोध । किरनमाली = सूर्य । लसदंजनऽदितिज = (लसत् + अंजना + अदिति + ज) अंजनी- रूपी अदितिसे जायमान होकर सुशोभित । कोक = चकवा । कोकनद = कमल । हंस = सूर्य । बालधि = पूँछ । कुधर = पहाड़ । पयोधि = समुद्र । जातुधान = राक्षस । हाता = हन्ता ।