विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)
Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६ विनय-पत्रिका पाकारिजित = पाक नामक दैत्यके शत्रु इन्द्रको जीतनेवाला मेघनाद। मर्मभित् = मर्म स्थानको भेदनेवाला। परिपाक = फल। वरद = वर देनेवाले। साका = यश। अभिचार = मोहन-उच्चाटन आदि प्रयोग तथा जादू-टोना। कारमन = किसीको जंत्र-मंत्र द्वारा मार डालनेके लिए प्रयोग। कृत्यादि = प्राणनाशिनी देवी आदि। जंता = जीतनेवाले। विभो = समर्थ। तमारी = सूर्य। भावार्थ—हे बन्दरोंके राजा हनुमानजी, तुम्हारी जय हो। तुम सिंहके समान पराक्रमी, देवताओंमें श्रेष्ठ, आनन्द और कल्याणके स्थान तथा कपाल- धारी शिवके अवतार हो। मोह, मद, क्रोध, काम आदि दुष्टोंसे परिपूर्ण घोर संसाररूपी रात्रिके लिए तुम सूर्य हो ॥१॥ हे अंजनीरूपी अदिति (देव-माता) से उत्पन्न होकर सुशोभित होनेवाले, तुम्हारी जय हो। तुम्हारा जन्म बन्दर केशरीरूपी कश्यप प्रजापतिसे हुआ है। तुम संसारके दुःखोंको हरनेवाले हो। हे कल्याणकारी हनुमानजी ! तुम लोक और लोकपालरूपी चकवा तथा कमल- का शोक हरनेवाले सूर्य हो ॥२॥ तुम्हारी जय हो। तुम्हारा शरीर बड़ा विशाल और विकराल है; तुम्हारे भारी भुजदण्ड और सर्वांगकी रचना वज्रके सार पदार्थसे हुई है। वज्रके समान तुम्हारे सुन्दर नख और दाँत सुशोभित हो रहे हैं। तुम्हारी पूँछ बहुत लम्बी है; तुम शत्रुओंका संहार करनेके लिए अस्त्र-शस्त्र धारण किये रहते हो; तुम पर्वतको भी हाथमें लिये रहते हो ॥३॥ हे सीताजीकी चिन्ताओं और दुःखोंको हरनेवाले, तुम्हारी जय हो। तुम राम-लक्ष्मणके आनन्दरूपी कमलको प्रफुल्लित करनेवाले हो। तुम बन्दर स्वभावसे हँसी-खेलमें ही अपनी पूँछसे लंका-दहन करने तथा अशोक-वनको बर्बाद करनेके लिए मध्याह्नकालीन सूर्य हो ॥४॥ तुम्हारी जय हो ! तुम समुद्रपर पत्थरका जहाज (पुल) तैयार करके राक्षसोंके बड़े भारी हर्षके हंता हो। तुम दुष्ट रावण, कुम्भकर्ण और मेघनादके मर्मस्थानोंको भेदकर उन्हें उनके कर्मोंका फल देनेवाले हो ॥५॥ हे त्रिभुवनके अपूर्व भूषण ! तुम्हारी जय हो ! तुम विभीषणको वर देनेवाले और संग्राममें श्रीरामजीके साथ यशःपूर्ण कार्य करनेवाले हो। तुम पुष्पक विमानपर बैठे हुए लक्ष्मण और सीताके सहित सूर्यवंशके सूर्य श्रीरामचन्द्रकी कीर्ति-पताका हो ॥६॥ तुम्हारी जय हो ! तुम दूसरोंके द्वारा किये गये यन्त्र-मन्त्र अभिचार (मोहन-उच्चा- टन) प्रयोगोंको ग्रसनेवाले तथा किसीको मार डालनेके लिए गुप्त प्रयोगों तथा