भारतकोश
विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

विनय पत्रिका (सटीक - गीताप्रेस)

Vinaya Patrika with Commentary - Gita Press

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

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६८ विनय-पत्रिका जयति संजीवनी-समय-संकट हनूमान धनुवान-महिमा बखानी । बाहुबल विपुल परमिति पराक्रम अतुल, गूढ़ गति जानकी-जान जानी जयति-रन-अजिर गंधर्व-गन-गर्वहर फिर किये राम गुनगाथ-गाता । मांडवी-चित्त-चातक-नवांबुद-वरन, सरन तुलसीदास अभय-दाता ॥५॥ शब्दार्थ—भूरि = बहुत । विबुधेश = इन्द्र । धनदादि = कुबेर इत्यादि । महाराज सम्राज = महासाम्राज्य । प्रेमगामी = तल्लीन । जंत्रित = वशीभूत । चित्रकूटद्रि (चित्रकूट+ अद्रि) = चित्रकूट पर्वत । पादुका = खड़ाऊँ । पुहुमि = पृथिवी । परमिति = प्रमाण जानकी- जान = रामचन्द्र । रन-अजिर = रणांगण, युद्धभूमि । गाता = गानेवाला, गायक । मांडवी = भरतजीकी अर्द्धाङ्गिनी । नवांबुद (नव+अम्बुद) = नवीन मेघ । भावार्थ—श्रीरामजीके चरणारविन्दोंका मकरन्द पान करनेके रसिक भ्रमर तथा अत्यन्त भाग्यशाली भरतलालकी जय हो ! आप संसारके भूषणस्वरूप सूर्य- वंशके आभूषण हैं, और राजाओंमें शिरोमणि रामचन्द्रजीके प्रेमी हैं ॥१॥ आपकी जय हो ! आपने ऐसे सुखप्रद महासाम्राज्यको छोड़ दिया, जो इन्द्र और कुबेर आदिके लिए भी अत्यन्त दुर्लभ है। आप तलवारकी धारके समान व्रतो महात्मा ओं- में सर्वश्रेष्ठ समझे जाते हैं, और आपकी शुद्ध बुद्धि-रूपी युवती स्त्री रामरूपी पतिके प्रेममें तल्लीन है ॥२॥ आपकी जय हो ! आप निष्काम भक्तिभावके वशी- भूत हृदयसे प्रिय भाई रामचन्द्रके लिए चित्रकूट पर्वतपर पैदल गये, रामजीके पादुका-रूपी राजाके मंत्री बनकर पृथिवीका पालन करते रहे तथा परमधर्मके धुरीको धारण करनेवाले एवं बड़े भारी वीर हैं ॥३॥ जय हो ! संजीवनी बूटी लाते समय संकट आनेपर हनुमान्जीने आपके धनुषबाणकी महिमाका बखान किया था, आपके बाहुबलकी अधिकता और अतुलित पराक्रमका यही प्रधान प्रमाण है। आपकी गूढ़गति केवल जानकी-वल्लभ रामजी जानते हैं ॥४॥ आप युद्ध-स्थानमें गन्धर्वोंका गर्व हरनेवाले तथा फिरसे उन्हें भी रामजीकी गुणावलीके गायक बनानेवाले हैं। आप महारानी मांडवीके चित्त-चातकके लिए नवीन मेघवर्ण हैं और शरणागत तुलसीदासको अभयदान देनेवाले हैं। आपकी जय हो ! विशेष १—'पादुका नृप सचिव'—भरतजी प्रतिदिन श्रीरामजीकी पादुकाका