भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

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ॐ श्रीमन्नारायणाय नमः

श्रीविष्णुपुराण

प्रथम अंश

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥

पहला अध्याय

ग्रन्थका उपोद्घात

श्रीसूत उवाच
ॐ पराशरं मुनिवरं कृतपौर्वाह्निकक्रियम्।<br>मैत्रेयः परिपप्रच्छ प्रणिपत्याभिवाद्य च॥ १॥**श्रीसूतजी बोले—**मैत्रेयजीने नित्यकर्मोंसे निवृत्त हुए मुनिवर पराशरजीको प्रणाम कर एवं उनके चरण छूकर पूछा—॥ १॥
त्वत्तो हि वेदाध्ययनमधीतमखिलं गुरो।<br>धर्मशास्त्राणि सर्वाणि तथाङ्गानि यथाक्रमम्॥ २॥“हे गुरुदेव! मैंने आपसे सम्पूर्ण वेद, वेदांग और सकल धर्मशास्त्रोंका क्रमशः अध्ययन किया है॥ २॥
त्वत्प्रसादान्मुनिश्रेष्ठ मामन्ये नाकृतश्रमम्।<br>वक्ष्यन्ति सर्वशास्त्रेषु प्रायशो येऽपि विद्विषः॥ ३॥हे मुनिश्रेष्ठ! आपकी कृपासे मेरे विपक्षी भी मेरे लिये यह नहीं कह सकेंगे कि 'मैंने सम्पूर्ण शास्त्रोंके अभ्यासमें परिश्रम नहीं किया'॥ ३॥
सोऽहमिच्छामि धर्मज्ञ श्रोतुं त्वत्तो यथा जगत्।<br>बभूव भूयश्च यथा महाभाग भविष्यति॥ ४॥हे धर्मज्ञ! हे महाभाग! अब मैं आपके मुखारविन्दसे यह सुनना चाहता हूँ कि यह जगत् किस प्रकार उत्पन्न हुआ और आगे भी (दूसरे कल्पके आरम्भमें) कैसे होगा ?॥ ४॥
यन्मयं च जगद्ब्रह्मन्द्यतश्चैतच्चराचरम्।<br>लीनमासीद्यथा यत्र लयमेष्यति यत्र च॥ ५॥तथा हे ब्रह्मन्! इस संसारका उपादान-कारण क्या है? यह सम्पूर्ण चराचर किससे उत्पन्न हुआ है? यह पहले किसमें लीन था और आगे किसमें लीन हो जायगा ?॥ ५॥
यत्प्रमाणानि भूतानि देवादीनां च सम्भवम्।<br>समुद्रपर्वतानां च संस्थानं च यथा भुवः॥ ६॥इसके अतिरिक्त [आकाश आदि] भूतोंका परिमाण, समुद्र, पर्वत तथा देवता आदिकी उत्पत्ति, पृथिवीका अधिष्ठान
सूर्यादीनां च संस्थानं प्रमाणं मुनिसत्तम।<br>देवादीनां तथा वंशान्मन्वूनमन्वन्तराणि च॥ ७॥और सूर्य आदिका परिमाण तथा उनका आधार, देवता आदिके वंश, मनु, मन्वन्तर,
कल्पान् कल्पविभागांश्च चातुर्युगविकल्पितान्।<br>कल्पान्तस्य स्वरूपं च युगधर्मांश्च कृत्स्नशः॥ ८॥[बार-बार आनेवाले] चारों युगोंमें विभक्त कल्प और कल्पोंके विभाग, प्रलयका स्वरूप, युगोंके

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