भारतकोश
विष्णु पुराण

विष्णु पुराण

Vishnu Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 558 में से

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पृष्ठ 122

ॐ श्रीमन्नारायणाय नमः

श्रीविष्णुपुराण

द्वितीय अंश

पहला अध्याय

प्रियव्रतके वंशका वर्णन

श्रीमैत्रेय उवाचश्रीमैत्रेयजी बोले— हे भगवन्! हे गुरो! मैंने जगत्की सृष्टिके विषयमें आपसे जो कुछ पूछा था वह सब आपने मुझसे भली प्रकार कह दिया॥१॥ हे मुनिश्रेष्ठ! जगत्की सृष्टिसम्बन्धी आपने जो यह प्रथम अंश कहा है, उसकी एक बात मैं और सुनना चाहता हूँ॥२॥ स्वायम्भुवमनुके जो प्रियव्रत और उत्तानपाद दो पुत्र थे, उनमेंसे उत्तानपादके पुत्र ध्रुवके विषयमें तो आपने कहा॥३॥ किंतु, हे द्विज! आपने प्रियव्रतकी सन्तानके विषयमें कुछ भी नहीं कहा, अतः मैं उसका वर्णन सुनना चाहता हूँ, सो आप प्रसन्नतापूर्वक कहिये॥४॥
भगवन्सम्पगाख्यातं ममैतदखिलं त्वया।<br>जगतः सर्गसम्बन्धि यत्पृष्टोऽसि गुरो मया॥ १<br>योऽयमंशो जगत्सृष्टिसम्बन्धो गदितस्त्वया।<br>तत्राहं श्रोतुमिच्छामि भूयोऽपि मुनिसत्तम॥ २<br>प्रियव्रतोत्तानपादौ सुतौ स्वायम्भुवस्य यौ।<br>तयोरुत्तानपादस्य ध्रुवः पुत्रस्त्वयोदितः॥ ३<br>प्रियव्रतस्य नैवोक्ता भवता द्विज सन्ततिः।<br>तामहं श्रोतुमिच्छामि प्रसन्नो वक्तुमर्हसि॥ ४
श्रीपराशर उवाचश्रीपराशरजी बोले— प्रियव्रतने कर्दमजीकी पुत्रीसे विवाह किया था। उससे उनके सम्राट् और कुक्षि नामकी दो कन्याएँ तथा दस पुत्र हुए॥५॥ प्रियव्रतके पुत्र बड़े बुद्धिमान्, बलवान्, विनयसम्पन्न और अपने माता-पिताके अत्यन्त प्रिय कहे जाते हैं; उनके नाम सुनो—॥६॥ वे आग्नीध्र, अग्निबाहु, वपुष्मान्, द्युतिमान्, मेधा, मेधातिथि, भव्य, सवन और पुत्र थे तथा दसवाँ यथार्थनामा ज्योतिष्मान् था। वे प्रियव्रतके पुत्र अपने बल-पराक्रमके कारण विख्यात थे॥७-८॥ उनमें महाभाग मेधा, अग्निबाहु और पुत्र—ये तीन योगपरायण तथा अपने पूर्वजन्मका वृत्तान्त जाननेवाले थे। उन्होंने राज्य आदि भोगोंमें अपना चित्त नहीं लगाया॥९॥
कर्दमस्यात्मजां कन्यामुपयेमे प्रियव्रतः।<br>सम्राट् कुक्षिश्च तत्कन्ये दशपुत्रास्तथाऽपरे॥ ५<br>महाप्रज्ञा महावीर्या विनीता दयिता पितुः।<br>प्रियव्रतसुताः ख्यातास्तेषां नामानि मे शृणु॥ ६<br>आग्नीध्रश्चाग्निबाहुश्च वपुष्मान्द्युतिमांस्तथा।<br>मेधा मेधातिथिर्भव्यः सवनः पुत्र एव च॥ ७<br>ज्योतिष्मान्दशमस्तेषां सत्यनामा सुतोऽभवत्।<br>प्रियव्रतस्य पुत्रास्ते प्रख्याता बलवीर्यतः॥ ८<br>मेधाग्निबाहुपुत्रास्तु त्रयो योगपरायणाः।<br>जातिस्मरा महाभागा न राज्याय मनो दधुः॥ ९

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